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गाय के गोबर से बनाई जा रही मूर्तियां

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दिबियापुर (औरैया)। दीपावली नजदीक आते देख गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां बनाने का काम तेजी से शुरू हो गया है। इस बार महिलाओं ने गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां बनाने के लिए गाय के गोबर में पंचगव्य और विभिन्न बीजों का प्रयोग शुरू किया है। पिछले वर्ष वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए औतों गांव की महिलाओं ने गाय के गोबर से गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां बनाना शुरू किया था। यह मूर्तियां लोगों ने काफी पसंद की थीं।
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रविवार को ग्राम पंचायत औतों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुमन चतुर्वेदी ने गाय के गोबर के दिये और गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति बनाकर वोकल से लोकल की ओर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के शुरुआत की। गांव के रक्षा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने पिछले वर्ष की भांति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार करने का बीड़ा उठाया है। गाय के शुद्ध गोबर से दिये बनाने शुरू कर दिए है। मिशन शक्ति के तहत महिलाएं आत्मनिर्भर होकर सुमन चतुर्वेदी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है।
समूह की महिलाओं में अलका, नेहा, नीतू, माधुरी, शशि, सुनीता, सुमन ने दिये बनाने शुरू कर दिया है। मूर्ति में पंचगव्य और बीजों का प्रयोग किया जा रहा है। ताकि जिस स्थान पर भी मूर्ति विसर्जित होगी। वहां नए पौधे का सृजन होगा। महिलाएं मूर्ति बनाकर विसर्जन से सृजन करने के लिए का प्रयासरत है। बालिकाओं में वंशिका, भूमि, शैलजा, ईशु, मणि भी दियों में रंग भरती नजर आ रहीं हैं। महिलाओं ने बताया वर्तमान में अधिकांश मूर्तियां मिट्टी की बजाय पीओपी आदि सामग्री से बनतीं हैं। गाय का गोबर पूजा के लिए शुद्ध माना जाता है। इसी के चलते पिछले वर्ष गाय के गोबर से मूर्तियां एवं दिये बनाने शुरू किए थे।
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