बारह घंटे का सफर तय करके घर पहुंचीं अंशिका का माता-पिता ने तिलक करके जोरदार स्वागत किया। बेटी को देखकर माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। इस दौरान अंशिका ने यूक्रेन के हालात के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उनकी जिंदगी के पांच दिन बड़े भयानक गुजरे हैं। इन खौफनाक दिनों को जिंदगी भर भूल नहीं पाएंगे। हर समय मौत सिर पर मंडरा रही थी। यह सबसे बुरा दौर था। गोली और बम धमाकों की आवाज सुनकर शरीर कांप उठता था। हर समय घर पहुंचने की चिंता लगी रहती थी। चौबीस घंटे तैयार बैठे रहते थे, कि कब कहां के लिए भागना पडे़, लेकिन अब मैं घर पहुंच गई हूं...यह पल बेहद खुशी के हैं।
जोया निवासी डॉ.गौतम की बेटी अंशिका यूक्रेन में एमबीबीएस तृतीय वर्ष की छात्रा है। अंशिका ने रूस के हमले के बाद यूक्रेन में बिगड़े हालात को बखूबी देखा है। उनका कहना है कि 25 फरवरी से दो मार्च तक के पांच दिन उनकी जिंदगी के सबसे खौफनाक मंजर वाले रहे हैं। उन्होंने बताया कि 25 फरवरी की सुबह से यूक्रेन में इंटरनेशनल कार्ड बंद कर दिए गए। एटीएम से रुपये नहीं निकल रहे थे। 15 से 18 किलोमीटर पैदल चलकर रोमानिया पहुंचे थे। बॉर्डर पर भीड़ इतनी थी कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा था। बॉर्डर पार कराने में यूक्रेनी नागरिकों को प्राथमिकता दी जा रही थी। भारतीय छात्रों के साथ धक्का-मुक्की और गलत बर्ताव किया जा रहा है। बॉर्डर पर धक्का-मुक्की के दौरान उनकी नाइजीरिया की दोस्त की हालत बिगड़ गई थी, लेकिन उसे किसी तरह संभाला।
उन्होंने बताया कि युद्ध में शहीद हुए नवीन हमारे सीनियर ग्रुप में थे, जो अपने जूनियर साथियों के लिए खाना लेने गए थे। उनकी शहादत को कई छात्रों ने अपनी आंखों से देखा। अंशिका ने बताया कि सरकार छात्रों को निकालने में पूरा सहयोग कर रही है। वह रात तीन बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंच गई थी। यहां सरकार के मंत्री और अधिकारियों ने छात्रों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। साथ ही एयरपोर्ट से निकलते ही उन्हें प्रदेश सरकार की तरफ से इनोवा कार ने रिसीव किया और घर पर छोड़ा है। अंशिका ने बताया कि अब वह घर आ गईं हैं... वह बहुत खुश हैं। इतनी खुशी पांच दिन में एक बार नहीं हुई। यूक्रेन में बीते खौफनाक पलों पर यह खुशी भारी है। वहीं बेटी को सकुशल देखकर माता राजबाला, पिता डॉ.गौतम की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। माता-पिता ने बेटी का तिलक कर स्वागत किया।