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उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रतियों ने मांगी खुशहाली

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अमरोहा के वासुदेव तीर्थ मंदिर तालाब में उगते सूर्य के सामने पूजा करते व्रती। - फोटो : JPNAGAR
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अमरोहा। नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ चार दिवसीय छठ पर्व गुरुवार की सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। व्रतियों ने वासुदेव मंदिर के तालाब में विधि विधान से पूजा अर्चना की। व्रती महिलाओं ने सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की खुशहाली और उनकी लंबी उम्र की कामना की। पानी में खड़े होकर छठ माता के लोकगीत गुनगुनाए।
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गुरुवार की सुबह तमाम व्रती छठ मैया की पूजा को वासुदेव तीर्थ मंदिर के सरोवर तालाब पर पहुंचे। यहां पानी में खड़े होकर छठ मइया की पूजा-अर्चना की। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी कपूर, अगरबत्ती जलाकर माथा टेका। छठ माता की पूजा करने के बाद नदी और पोखरे के पानी में खड़े होकर व्रती माताएं भगवान सूर्यदेव के उदय होने का इंतजार करती रहीं। सुबह सूर्योदय के बाद सभी व्रतियों ने सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। इस दौरान कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए, केरवा जे फरेला घवद से ओह पर सुगा मॅडराय...। घाट पर हमहूं अरघिया देइबे हे छठ मइया, कईली बरतिया तोहार हे छठ मइया...। छठ माता के गीतों मंदिर परिसर गूंज उठा। 36 घंटे के उपवास का पारायण किया। इस दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा गया। वहीं, परिजनों ने आतिशबाजी की। व्रती माताओं ने इसी तरह बेटे, पति और परिवार के अन्य सदस्यों की लंबी उम्र की मंगलकामना की। इसके साथ ही 36 घंटे के निर्जला व्रत का समापन हो गया। व्रती माताओं ने घर जाकर शर्बत और चाय पीने के साथ व्रत का पारण किया।
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