अमरोहा। जीवित किशोरी को मृत दर्शाकर ऑनर किलिंग के झूठे आरोप में निर्दोष परिजनों को जेल भेजने वाले षड्यंत्रकारी पुलिस कर्मियों राहत नहीं मिल रही है। इंस्पेक्टर की जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब छह पुलिस कर्मियों ने अग्रिम जमानत याचिका के लिए आवेदन किया है। न्यायालय ने दो महिला कांस्टेबलों के मामले में सुनवाई करते हुए जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। जबकि दरोगा समेत चार पुलिस कर्मियों की जमानत पर सुनवाई तीस नवंबर को होगी। इन सभी आरोपी पुलिस कर्मियों पर षड्यंत्र रचना, झूठे और गंभीर अपराध के लिए कूटरचित साक्ष्य गढ़ना, किसी को दस दिन से अधिक गलत तरीके से अभिरक्षा में रखने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
आदमपुर थानाक्षेत्र के एक गांव निवासी किसान की बेटी छह फरवरी 2019 को खेत से गायब हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने किशोरी की हत्या दर्शाकर 29 दिसंबर 2019 को उसके किसान पिता, भाई और एक रिश्तेदार को ऑनर किलिंग के झूठे मुकदमे में जेल भेजे दिया था। पुलिस की लापरवाही के कारण निर्दोष होते हुए भी किशोरी के पिता को 11, भाई को नौ और रिश्तेदार को 15 महीने जेल में गुजारने पड़े। इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर तत्कालीन इंस्पेक्टर व विवेचक अशोक कुमार शर्मा, एसआई मोहम्मद आरिफ, राकेश कुमार, मनोज कुमार, विनोद कुमार त्यागी, सिपाही भूपेंद्र सिंह, कृष्णवीर सिंह, अनिरुद्ध, दीपक कुमार, महिला सिपाही अपेक्षा तोमर और निधि के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
इस मामले में आरोपी इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा ने 26 अक्तूबर को जिला जज की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दायर किया था। बारह नवंबर को प्रकरण में सुनवाई करते हुए अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता कुलदीप चौधरी ने बताया कि अब दारोगा विनोद कुमार त्यागी, सिपाही कृष्णवीर सिंह, अनिरुद्ध सिंह, दीपक, महिला सिपाही अपेक्षा तोमर और निधि ने भी जिला जज की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। जिसमें बुधवार को अदालत ने अपेक्षा तोमर और निधि की जमानत याचिका खारिज कर दिया है। जबकि अन्य चार पुलिस कर्मियों की याचिका पर सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तिथि नियत की है।
यह था मामला
अमरोहा। आदमपुर थानाक्षेत्र के एक गांव में किसान की पंद्रह वर्षीय बेटी छह फरवरी 2019 को खेत से अचानक गायब हो गई थी। इस मामले में किशोरी के भाई ने पांच लोगों के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने नामजद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद भी अपहृत किशोरी की बरामदगी नहीं हो सकी थी। तत्कालीन एसपी ने मुकदमे की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा को सौंपी थी। इसके बाद षड्यंत्रकारी इंस्पेक्टर ने घटना का फर्जी खुलासा कर डाला। 29 दिसंबर 2019 को किशोरी के किसान पिता, भाई और एक रिश्तेदार को ऑनर किलिंग में जेल भेज दिया था। लेकिन, जिस किशोरी को पुलिस ने मृत दर्शाया था, लॉकडाउन के दौरान वह 7 अगस्त 2020 को अपने प्रेमी के घर मिल गई थी। इसके बाद षड्यंत्रकारी पुलिस की झूठी स्क्रिप्ट से पर्दा उठ गया था।