अमरोहा। नगर पालिका से लेकर सत्ता के सर्वोच्च शिखर संसद तक कुर्सी की लड़ाई है, लेकिन एक कुर्सी ऐसी भी है, जो हमारे जनप्रतिनिधियों को पसंद ही नहीं है। ये कुर्सी रोडवेज बस की है। बस में सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायकों के लिए सीटें रिजर्व हैं, लेकिन इनमें अमरोहा के किसी भी जनप्रतिनिधि ने सफर नहीं करते। परिवहन निगम अधिकारियों के मुताबिक अमरोहा में वर्ष 2012 में बस अड्डा स्थापित हुआ है। तब से आज तक किसी सांसद, विधायक को बस में सफर करते नहीं देखा गया। वर्षों से विशेष श्रेणी के व्यक्तियों की निशुल्क यात्रा के रिपोर्ट में सांसद-विधायकों के कॉलम में शून्य बना हुआ है।
दरअसल, जनप्रतिनिधियों को लाखों रुपये तक के रेल कूपन, हवाई यात्रा की सुविधा है। इनमें वह डीजल भत्ते के रूप में हजारों रुपये ले सकते हैं। इतना ही नहीं बिना ब्याज के वाहन खरीदने के लिए लोन दिया जाता है। बस में आगे की तीन सीटें इनके लिए आरक्षित रखी जाती है। वह सूबे किसी भी स्टेशन से बैठ सकते हैं, इसके लिए कोई फार्म नहीं भरा जाता बल्कि केवल पहचान पत्र देखकर ही सीट दे दी जाती है। हालांकि की सांसद और विधायकों को सफर कराने का सौभाग्य भारतीय रेल को खूब मिलता है। लेकिन शायद सरकारी बसें उनके कद के हिसाब से बहुत छोटी हैं या फिर आम जनता के साथ भीड़ का हिस्सा बनना जनता के प्रतिनिधियों को गंवारा नहीं है।
सीट पर नाम पढ़कर बैठने से घबराते हैं लोग
अमरोहा। जब कभी आप रोडवेज बस में चढ़ते है तो आपको सामने वाली सीट के ऊपर लिखा दिखता होगा कि यह सीट सांसद और विधायक के लिए रिजर्व है। इसलिए आम आदमी कई बार डर के इस सीट पर बैठती नहीं है। बाद में देर तक इंतजार के बाद भी किसी के नहीं आने पर लोग बैठ जाते हैं। लेकिन फिर भी वह घबराते रहते हैं कि कहीं कोई आ न जाए। क्योंकि सबको यही पता होता है कि यह सीट एमपी, एमएलए के लिए है। हो सकता है कि नेताजी नहीं तो कोई उनका अपना ही आ जाए।
उनके पास ऐसी गाड़ियां है तो क्यूं करें बस का सफर
अमरोहा। मुरादाबाद जा रही बस के ड्राइवर ने बताया कि उन्हें बस में सफर करने की जरूरत क्या है। उनके पास ऐसी गाडियां हैं। हेलीकॉप्टर होते हैं, उनके लिए ऐसी ट्रेनें हैं। उबड़-खाबड़ सडक़ों पर रोडवेज की बसों में सफर करके हमारे माननीय क्यों अपना समय और कपड़े खराब करेंगे।
रिजर्वेशन का कोई फायदा नहीं
अमरोहा। कौशांबी के लिए जाने वाली बस के चालक ने कहा कि अब तो इन बसों से माननीयों के लिए रिजर्वेशन सिस्टम को हटा देना चाहिए। कोई सफर तो करता नही है। इससे अच्छा तो बुजुर्गों के लिए एक्स्ट्रा सीट रिजर्व करनी चाहिए।
सुधर सकती है हालत
अमरोहा। सरकारी बसों की खस्ता हालत किसी से छिपी नहीं है। अगर समय-समय पर सांसद-विधायक इन बसों में सफर करते रहें तो वह बसों की खराब हालत से रूबरू हो सकते हैं। हो सकता है रोडवेज बसों की हालात में कुछ सुधार हो सके।
हमेशा रिजर्व रहती है थ्री सीटर
अमरोहा। विधान सभा से लेकर संसद तक हनक रखने वाले माननीय की कुर्सी थ्री सीटर में होती है। ये तीनों सीटें उनके लिए हमेशा आरक्षित रहती हैं। इसके अलावा रोडवेज बस में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लोकतंत्र रक्षक, मान्यता प्राप्त पत्रकार, विकलांग और महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित रहती हैं।
वर्ष 2012 में बस अड्डा बना है। तब से लेकर आज तक कोई जनप्रतिनिधि ने बस में यात्रा नहीं की है। बस अड्डा स्थापित होने से पहले का लेखाजोखा मुरादाबाद से मिल सकेगा। वर्षों पहले एक-दो पूर्व विधायक ने यात्रा की थी, यह भी रिकार्ड में दर्ज नहीं हैं।-भरत सिंह, रोडवेज बस स्टेशन प्रभारी अमरोहा