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गंगा में दीपदान कर अपनों को किया याद, आंखें हुईं नम

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तिगरी मेले में गंगा घाट पर स्नान के दौरान लगी श्रद्धालुओं की भीड़। - फोटो : JPNAGAR
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तिगरी धाम। कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर सूर्यास्त के समय श्रद्धालुओं ने यहां दीपदान किया तो तिगरी के सूने घाट जगमगा उठे। ऐसा प्रतीत होने लगा मानों आसमान में टिमटिमाने वाले तारे जमीन पर उतर आएं हों। यह सिलसिला काफी देर शाम तक चला रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने नम आंखों से पूर्वजों की दिवंगत आत्माओं की शांति को दीये जलाकर गंगा को दान किए। वहीं हमेशा के लिए दूर जा चुके अपनों के लिए दीपदान किए तो लोगों की आंखों में आंसू भर आए। तिगरी में गंगा घाटों का माहौल गमगीन हो गया।
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गुरुवार की शाम सूर्यास्त होते ही तिगरी में हजारों श्रद्धालु दीपदान के लिए घाट पर पहुंच गए और नम आंखों से दीपदान का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक जारी रहा। अपने सगे संबंधी और परिजनों से बिछड़े लोगों को याद कर लोगों की आंखें भर आईं। इस परंपरा को निभाते वक्त घाट का नजारा ऐस हो गया जैसे आसमान में टिमटिमाने वाले तारे गंगा में उतर आए हों। कुछ श्रद्धालु जाम में फंसने के कारण सूर्य अस्त होने के काफी देर बाद तिगरी गंगाघाट पहुंच पाए। इसके बाद दीपदान किया। दीपदान के बाद पुरोहितों को वस्त्र, अन्न और दक्षिणा आदि का दान भी किया गया। इस दौरान घाटों पर काफी सफाई और प्रकाश की व्यवस्था रही। इन श्रद्धालुओं को दीपों के लिए इधर उधर भटकना नहीं पड़ा, इसके लिए घाटों पर ही दीप और गंगा पूजन की सामग्री बेचने वाले घूमते दिखे। मान्यता है कि महाभारत युद्ध में मारे गए हजारों सैनिक और असंख्य योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों की मौजूदगी में सर्वप्रथम चतुर्दशी को दीपदान किया था, तब से यह परंपरा चल रही है।

तिगरी धाम में गंगा घाट किनारे दीपदान करते एक परिवार के सदस्य।- फोटो : JPNAGAR

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