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84 ग्राम पंचायत सहित 139 राजस्व गांवों में अधिकारी-कर्मचारियों को नहीं मिला कोई गरीब

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मुख्यमंत्री आवास योजना को ब्लाक के अधिकारी और कर्मचारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। कर्मचारी पात्र तलाश करने को ऑफिस से बाहर नहीं निकले। नतीजा यह रहा कि चार साल में योजना के तहत आवास मुहैया कराने के लिए एक भी पात्र नहीं मिला। ब्लाक से शासन को रिपोर्ट भी भेज दी गई कि एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है, जिसे आवास मुहैया कराया जा सके, जबकि हरेक ग्राम पंचायत में आठ-दस लोग गरीब रहते हैं।
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वर्ष-2018 में मुख्यमंत्री आवास योजना शुरू की गई थी। जिसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में दैवीय आपदा पीड़ित, आवास विहीन लोगों, दिव्यांगों और कुष्ठ रोगियों को सिर ढकने के लिए छत मुाहैया कराना था। जिनके घर कच्चे हैं या उनके यहां झोपड़ी पड़ी है, वह भी मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास पाने के हकदार हैं। इसके अलावा जीर्णशीर्ण आवास वाले लोगों को भी योजना के माध्यम से मकान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इस योजना के तहत एक लाख 10 हजार रुपये शासन से मिलते हैं।
गजरौला ब्लाक में 84 ग्राम पंचायत सहित 139 राजस्व ग्राम हैं। योजना को चार साल हो गए। मगर चार साल में ब्लाक के अधिकारी और कर्मचारियों को एक भी पात्र ऐसा नहीं मिला, जिसको मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत सिर ढकने को छत मुहैया कराई जा सके। गौर करने वाली बात यह है कि ब्लाक के अधिकारियों ने शासन को अपनी रिपोर्ट भी भेज दी कि गजरौला ब्लाक में एक भी व्यक्ति आवास पाने के लिए पात्र नहीं है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि ब्लाक के अधिकारी और कर्मचारियों ने क्षेत्र में भ्रमण कर पात्र तलाश करने की बजाय ऑफिस में बैठकर ही अपनी रिपोर्ट बना कर शासन को भेज दी। उनके बाहर नहीं निकलने का खामियाजा ग्रामीण इलाकों में रहने वाले वह गरीब भुगत रहे हैं, जिन पर गर्मी, सर्दी और बारिश से बचने के लिए सिर ढकने को छत नहीं है।
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ब्लाक में अधिकारी और कर्मचारियों की पूरी फौज है। यहां पर खंड विकास अधिकारी, चार सहायक विकास अधिकारी 11 ग्राम पंचायत सचिव और चार बाबुओं की तैनाती है। इसके अलावा चार तकनीकि सहायक भी तैनात हैं। अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी और मनरेगा में अन्य को जोड़ कर कम से कम 30 का स्टाफ है, लेकिन इसके बावजूद एक भी पात्र को तलाश न कर पाना, ब्लाक के अधिकारी व कर्मचारियों की कार्य प्रणाली पर सवाल उठा रहा है।
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