अमेठी। शहर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्टेडियम को 4.93 करोड़ रुपये की लागत से सुविधाओं से लकदक किया जा रहा है। निर्माण कार्य पूर्ण करने की डेडलाइन जून 2021 थी। बावजूद इसके अब तक कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। कार्य की धीमी गति से खिलाड़ियों को स्टेडियम में मौजूद सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रशासन की सख्ती के बावजूद कार्यदायी संस्था निर्माण कार्य को लेकर लापरवाह नजर आ रही रही है।
शहर के मुंशीगंज रोड स्थित दत्ता का पुरवा में अरसा पूर्व स्पोर्ट्स स्टेडियम की स्थापना हुई थी। करीब 20 वर्ष पूर्व प्रदेश की बसपा सरकार ने इस स्टेडियम का नाम डॉ. भीमराव अंबेडकर स्टेडियम कर दिया था। इन दिनों यह स्टेडियम बदहाल हो चला था।
पिछले दिनों शासन से चार करोड़ 93 लाख 20 हजार रुपये की लागत से स्टेडियम का कायाकल्प करने का निर्णय लिया था। राशि आवंटित करने के साथ शासन ने उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड निर्माण प्रखंड सुल्तानपुर को कार्यदायी संस्था नामित किया था।
स्वीकृति मिलने के बाद 28 अगस्त 2019 को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी व स्थानीय विधायक गरिमा सिंह की मौजूदगी में शिलान्यास किया गया था। आवंटित राशि से स्टेडियम परिसर में मल्टीपरपज हॉल बैडमिंटन हॉल, स्वीमिंग पूल, पवेलियन, 2500 वर्ग मीटर सीसी रोड, मिल्टरेशन प्लांट, टिकट काउंटर रूम, पंप रूम, सबमर्सिबल पंप, बाउंड्रीवॉल, लाइट, मुख्य द्वार, हॉस्टल गेट तथा मैदान का उच्चीकरण किए जाने हेतु मिट्टी भराई आदि कार्य कराया जा रहा है।
स्टेडियम परिसर में स्वीकृत निर्माण कार्य को पूरा करने की डेडलाइन जून 2021 में पूरी होनी थी। बावजूद इसके अभी तक बैडमिंटन हॉल का काम 20 फीसदी पूरा नहीं हुआ है। टिकट काउंटर, गेट, नाली आदि का कार्य अभी राजगीरों द्वारा किया जा रहा है। लाइट का कार्य अभी तक नहीं शुरू हो सका है। मैदान में मिट्टी भराई का कार्य अधूरा पड़ा है। हॉस्टल गेट का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। कार्य पूर्ण नहीं होने से स्टेडियम परिसर में खिलाड़ियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
स्वच्छ पेयजल का अभाव
पीने का शुद्ध जल मुहैया कराने के लिए स्टेडियम परिसर में सिर्फ इंडिया-मार्का-टू हैंडपंप ही लगे हैं। जिससे स्टेडियम में रहने वाले व बाहर से आने वाले खिलाडिय़ों के साथ अधिकारियों-कर्मचारियों को इसी से अपनी प्यास बुझानी पड़ती है। लोगों का कहना है कि स्टेडियम परिसर में स्वच्छ पेयजल के लिए आरओ लगाया जाना चाहिए।
नहीं है हाईमास्ट लाइट की व्यवस्था
स्टेडियम परिसर में हाईमास्ट लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। स्टेडियम प्रशासन की ओर से स्थानीय जनप्रतिनिधियों से हाईमास्ट लाइट लगवाए जाने की मांग की गई है। जिला क्रीड़ा अधिकारी विमला सिंह ने बताया कि स्टेडियम परिसर में विद्युत पोलों पर लाइट लगी है लेकिन हाईमास्ट लाइट नहीं होने से खिलाड़ियों को रात में समस्या आती है।
ग्राउंड के बीच में लगे खंभे बन रहे बाधा
स्टेडियम परिसर में विद्युत आपूर्ति के लिए हाईटेंशन लाइन एवं एलटी लाइन बनाई गई है। विद्युत लाइन के खंभे मैदान के बीच में लगे हैं। खंभे मैदान में होने से विभिन्न खेलों के लिए पर्याप्त स्पेस नहीं मिल पाता। इससे खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खिलाड़ियों का कहना है कि यदि खंभे मैदान से हटकर किनारे लग जाएं तो मैदान में स्पेस बढ़ जाएगा और उन्हें सहूलियत मिलेगी। स्टेडियम परिसर में बैठने की व्यवस्था नहीं है। सीमेंट की सीट मैदान में लग जाए तो तैयारी करने वाले युवाओं को सहूलियत मिलेगी।
कर्मचारियों का अभाव
जिला खेल कार्यालय एवं स्टेडियम परिसर में पद के सापेक्ष कर्मचारियों का अभाव है। स्टेडियम परिसर में स्वीपर, चौकीदार एवं प्रशिक्षक नहीं हैं। स्टेडियम में जिला क्रीड़ा अधिकारी विमला सिंह, उप क्रीड़ा अधिकारी मो. शमीम और मो. शरीफ के साथ दो लिपिक तैनात हैं। फुटबॉल और हॉकी के अंशकालिक प्रशिक्षक पद पर मो. नदीम और मो. आरिफ की तैनाती हुई है।
स्टाफ बढ़ाने के लिए भेजा पत्र
जिला क्रीड़ा अधिकारी विमला सिंह ने बताया कि क्रिकेट बैडमिंटन भारोत्तोलन आदि खेलों में प्रशिक्षण दिए जाने को लेकर प्रशिक्षकों की तैनाती किए जाने की मांग की गई है। मांग पत्र निदेशालय को भेजा जा चुका है।
जमा करनी होगी फीस
जिला क्रीड़ा अधिकारी ने बताया कि छात्रावास के अलावा आसपास के आने वाले खिलाड़ियों के लिए विभिन्न खेलों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित है। इसमें आठ वर्ष से 18 वर्ष के भीतर आयु वर्ग के बच्चों को 160 रुपये एक वर्ष के लिए शुल्क जमा करना होगा वहीं 18 वर्ष से ऊपर के युवाओं को 200 रुपये प्रति माह और 40 वर्ष से ऊपर के लोगों को 300 रुपये प्रतिमाह शुल्क जमा करना होगा। बैडमिंटन और स्वीमिंग के लिए 18 वर्ष से नीचे के बच्चों को 300 रुपये प्रति माह और इससे ऊपर 600 रुपये प्रति माह शुल्क है। जिम के लिए 1000 रुपये प्रतिमाह का शुल्क निर्धारित किया गया है।
सीधे बाइपास पहुंचने के लिए मार्ग नहीं
स्टेडियम परिसर की बाउंड्रीवाल में दो गेट बनाए गए हैं। बाउंड्रीवाल के दूसरे गेट से बाईपास की दूरी महज चंद्र मीटर है। अगर बाइपास से स्टेडियम के लिए रास्ता बन जाता है तो स्टेडियम परिसर में पहुंचने के लिए लोगों को काफी आसानी होगी। उन्हें स्टेडियम पहुंचने के लिए किसी से पूछने की आवश्यकता नहीं होगी।
अंधकार में है बच्चों का भविष्य
स्टेडियम परिसर स्थित हॉस्टल की मरम्मत का कार्य विभाग द्वारा स्वीकृत राशि एक करोड़ आठ लाख 89 हजार रुपये की लागत से हुआ। मरम्मत कार्य पूर्ण होने के तत्काल बाद कोरोना शुरू हो गया। निदेशालय के निर्देश पर 11 मार्च 2019 को हॉस्टल बंद कर दिया गया। तब से अब तक दो वर्ष बीत गए अभी तक हॉस्टल खुलने का कोई निर्देश नहीं आया। ऐसे में हॉस्टल में रहकर तैयारी करने वाले पंजीकृत 30 कबड्डी एवं हैंडबॉल के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
युवाओं का कहना
दिनेश कुमार ने बताया कि मैदान परिसर सही नहीं होने से फुटबॉल समेत कई खेल से जुड़े खिलाड़ियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। मैदान का उच्चीकरण कराने के साथ परिसर में अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। शिवम ने स्टेडियम परिसर को सुविधाओं से लैस करने का स्वागत करते हुए इसे अन्य अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने की मांग की। राहुल लोहिया ने कहा कि रात में प्रकाश के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। परिसर में दो हाईमास्ट लाइट लग जाएं तो खिलाड़ियों को सुविधा मिलेगी। संदीप पांडेय ने कहा कि सभी खेलों के लिए प्रशिक्षकों की तैनाती हो जाए तो क्षेत्र की ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। वे यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे।