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विकास कार्यों में अड़ंगे से खफा अध्यक्ष धरने पर बैठीं

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अंबेडकरनगर के अकबरपुर नगर पालिका परिषद में धरने पर बैठीं अध्यक्ष। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। कर्मचारियों के मानदेय भुगतान व विकास कार्यों में अड़ंगा लगाने का आरोप लगाते हुए अकबरपुर नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष सरिता गुप्ता शुक्रवार को नगर परिषद कार्यालय में अधिशाषी अधिकारी कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गईं। इससे पहले ईओ के रवैये से नाराज सभासदों व समर्थकों ने अधिशाषी अधिकारी को उनके कक्ष में बंधक बना लिया। कक्ष के बाहर धरने पर बैठीं अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों की पत्रावली से लेकर सेवा दे रहे संविदा कर्मियों के मानदेय भुगतान में व्यवधान डाला जा रहा है, जबकि कई पर्व नजदीक हैं।
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अनुचित मांग की तरफ इशारा करते हुए अध्यक्ष सरिता गुप्ता ने कहा कि बहुत सी बातें हैं, जो सार्वजनिक नहीं कही जा सकती हैं। इस बीच अध्यक्ष को मनाने के लिए एसडीएम व सीओ के बाद एडीएम भी पहुंचे, लेकिन वे डीएम के मौके पर आने और सभी मुद्दों पर बात करने की मांग पर डटी रहीं। इस बीच एडीएम ने ईओ को पुलिस सुरक्षा में उनके कक्ष से बाहर निकलवाकर कलेक्ट्रेट भिजवाया। अध्यक्ष का धरना तब भी जारी रहा।
जिला मुख्यालय स्थित अकबरपुर नगर पालिका परिषद कार्यालय परिसर में उस समय अफरातफरी मच गई, जब अध्यक्ष सरिता गुप्ता ने अधिशाषी अधिकारी पर मनमानी करने तथा विकास कार्यों में अड़ंगा लगाने का आरोप लगाते हुए धरना शुरू कर दिया। वे अधिशाषी अधिकारी के कार्यालय के सामने ही कुर्सी लगाकर बैठ गईं। उनके समर्थन में पति व भाजपा नेता मनोज गुप्त गुड्डू समेत कई सभासदों ने भी धरना शुरू कर दिया। अधिशाषी अधिकारी बीना सिंह उस समय अपने कक्ष में मौजूद थीं। बाहर धरने पर बैठीं अध्यक्ष सरिता गुप्ता ने आरोप लगाया कि लगभग एक माह पहले ही कार्यभार ग्रहण करने वाली अधिशाषी अधिकारी पूरी तरह मनमानी पर उतर आईं हैं। उनकी ओर से विकास कार्यों तथा कर्मचारियों के मानदेय भुगतान में अड़ंगेबाजी की जा रही है।
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अध्यक्ष के धरने पर बैठने की खबर मिलते ही एसडीएम मोइनुल इस्लाम, सीओ अशोक कुमार सिंह व कोतवाल अमित कुमार सिंह नगर परिषद कार्यालय पहुंच गए। वहां अध्यक्ष से धरना समाप्त करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान होने तक मैं धरने से नहीं उठूंगी। एसडीएम व सीओ काफी देर तक मान मनौव्वल करते रहे, लेकिन बात नहीं बनी। लगभग एक घंटे बाद एडीएम डॉ. पंकज कुमार वर्मा वहां पहुंचे। उन्होंने अध्यक्ष को भरोसा दिलाया कि सभी बिंदुओं पर वार्ता कर जरूरी समाधान निकाला जाएगा। एडीएम ने भी धरना समाप्त करने के लिए काफी देर तक वार्ता की, लेकिन अध्यक्ष का कहना था कि डीएम मौके पर आएं। सभी बिंदुओं पर निर्णायक बात हो। इसके बाद ही धरना समाप्त होगा।
अध्यक्ष सरिता गुप्ता की ओर से धरने पर डटे रहने के बाद एडीएम ने ईओ बीना सिंह को सुरक्षित उनके कक्ष से बाहर निकलवाया। इसके बाद पुलिस सुरक्षा के घेरे में कलेक्ट्रेट भिजवाया। उधर, एडीएम व ईओ के जाने के बाद अध्यक्ष ने कुर्सी से उतरकर बाकायदा जमीन पर बैठ लंबे धरने का संकेत दे दिया। आननफानन में दरी आदि मंगाकर बड़े धरने का इंतजाम शुरू हो गया। कई और सभासद एवं समर्थक भी आ गए। देर शाम समाचार प्रेषण तक धरना जारी रहा।
प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर बिफरीं अध्यक्ष
अध्यक्ष सरिता गुप्ता ने कहा कि कर्मचारियों के लंबित भुगतान के लिए मैंने अधिशाषी अधिकारी को अपने कक्ष में बुलवाया था। उनसे कहा गया कि भुगतान सुनिश्चित कराया जाए। वे इसके लिए तैयार नहीं हुईं। अलग-अलग नियम कानून बताने लगीं। मैंने इस पर उनसे कहा कि आप ही भुगतान का रास्ता निकालिए। स्वच्छता मिशन केंद्र व प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। इसमें कार्य कर रहे कर्मचारी कमजोर वर्ग से जुड़े होते हैं। उनका जीवनयापन सिर्फ मानदेय पर होता है। ऐसे में सिर्फ मानदेय को लेकर जरूरी निर्णय ले लिया जाए। अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मेरे द्वारा भुगतान की बात करने पर वे अभद्र ढंग से आचरण करते हुए उठीं और फाइल झटक कर कक्ष से बाहर निकल गईं। एक जनप्रतिनिधि के साथ उन्हें प्रोटोकॉल की मर्यादा का ख्याल नहीं रहा। इस तरह का आचरण अत्यंत आपत्तिजनक व दुर्भाग्यपूर्ण है। इसीलिए मजबूर होकर मुझे धरने पर बैठना पड़ा है।
छलक पड़े आंसू, कहा-ईओ ने मचा रखा है कोहराम
धरने पर बैठीं नगर परिषद अध्यक्ष सरिता गुप्ता शुक्रवार को भावुक हो गईं। मीडिया कर्मियों व अन्य को जानकारी देते समय उनकी आंख से आंसू छलक पड़े। आंसू पोंछते हुए सरिता ने कहा कि मैं लगातार अधिशाषी अधिकारी के मनमाने रवैये को नजरअंदाज करती आ रही हूं। तमाम मामलों में मैंने जानबूझकर नोटिस नहीं किया, जबकि ईओ का रवैया लगातार अनुचित बना हुआ है। एक महिला होने के नाते मैं अधिशाषी अधिकारी के पद पर तैनात महिला का सम्मान करती आई हूं, लेकिन कम दिन में ही हद पार हो गई है। अध्यक्ष ने मीडिया से बयान में कहा कि जबसे अधिशाषी अधिकारी ने कार्यभार ग्रहण किया है। तब से नगर पालिका परिषद में कोहराम मचा दिया है। यह ठीक नहीं है।
शोषण नहीं किया जाएगा बर्दाश्त
नगर परिषद अध्यक्ष सरिता गुप्ता के प्रतिनिधि व उनके पति मनोज गुप्त ने धरने पर बैठने के दौरान कहा कि नियम कानून के नाम पर अधिशाषी अधिकारी अपना राज चलाना चाह रहीं है। उनके द्वारा ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं, जो संभव नहीं हैं। अधिकारियों का नाम लेकर शोषण करने का प्रयास हो रहा है। यह कतई बर्दाश्त नहीं होगा। नियम के नाम पर स्वार्थ सिद्धि नहीं होने दी जाएगी। इसमें यदि कोई बड़ा अधिकारी भी शामिल होगा तो भी हम लोग जनहित में चुप नहीं बैठेंगे।
न काम हो पा रहा और न ही भुगतान
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष सरिता गुप्ता ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि शौचालयों की सफाई के लिए जो संविदा कर्मी रखे गए हैं, उनका भुगतान तीन माह से रुका है। आने वाले समय में तमाम पर्व हैं। उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। राज्य वित्त आयोग के तहत शहर में विकास के लिए टेंडर प्रक्रिया की पत्रावली पर काम नहीं किया जा रहा। इससे शहर का विकास तेजी से करने में अवरोध उत्पन्न हो रहा है। श्मशान घाट के सौंदर्यीकरण के लिए शासन से धन निर्गत हुआ है, लेकिन उस पर भी काम कराने के लिए जरूरी प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है। पुराने कार्यों के तमाम भुगतान ठेकेदारों के लंबित हैं। उन्होंने काम पूरा कर दिया है। लंबे समय से भुगतान रुका है, लेकिन उस पर भी उनके द्वारा हस्ताक्षर नहीं किए जा रहे। नगर परिषद क्षेत्र में पशु आश्रय स्थल स्थित है। उसके भूसे के लिए भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। अध्यक्ष ने कहा कि इन सब कार्यों के लिए आम नागरिकों के प्रति मेरी जवाबदेही बनती है। मुझे जनता के बीच रहना व जाना होता है। मैं अपने कर्मचारियों व नागरिकों के हित के लिए लगातार प्रयास कर रही हूं, लेकिन अधिशाषी अधिकारी उसमें बाधक बन रही हैं।
यह बोलीं अधिशाषी अधिकारी
अधिशाषी अधिकारी बीना सिंह ने कहा कि बिना बोर्ड प्रस्ताव के सामुदायिक शौचालय पर सफाई कर्मियों को तीन हजार रुपये प्रति माह पर रखा गया था। मैंने अध्यक्ष से बोर्ड प्रस्ताव की प्रति मांगी, लेकिन यह देने की बजाश् मुझ पर भुगतान का दबाव बनाया जाने लगा। इस पर मैंने भुगतान से मना कर दिया। इसके बाद जो कुछ हुआ, वह मैं अपने वरिष्ठ अधिकारियों को बताऊंगी इसके बाद जो निर्णय होगा, वह बताया जाएगा।
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