अंबेडकरनगर। धान व गेहूं की कंबाइन मशीन से कटाई/ मड़ाई होने के कारण कुछ क्षेत्रों में कृषकों द्वारा फसल अवशेष जलाए जा रहे हैं। इसे रोकने के लिए अब पराली दो खाद लो अभियान शुरू किया गया है। किसान दो ट्रॉली पराली पशु आश्रय स्थलों पर देकर एक ट्रॉली गोबर की खाद प्राप्त कर सकते हैं। वैसे भी पराली जलाने पर वातावरण प्रदूषित होने के साथ-साथ मिट्टी के पोषक तत्वों को अत्यधिक क्षति होती है। इसलिए किसानों को कंबाइन के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगवाकर ही अपने फसलों की कटाई कराना चाहिए। जिले में अब तक पराली जलाने की 17 घटनाओं की पुष्टि होने पर किसानों पर 45 हजार रुपए का जुर्माना अधिरोपित किया गया है। कुछ स्थानों पर कंबाइन हार्वेस्टर बगैर एसएमएस, स्ट्रा रीपर, बेलर आदि के बिना धान की फसल काटने पर भी कार्रवाई की गई है।
जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने बताया कि पराली जलाने की घटना को रोकने के लिए पराली दो गोबर की खाद लो अभियान शुरु किया गया है। किसान पशु आश्रय स्थलों पर दो ट्रॉली पुआल देकर एक ट्रॉली गोबर की खाद प्राप्त कर सकते हैं। फसल अवशेष को तेज गति से सड़ाने के लिए कृषकों को कृषि विभाग द्वारा नि:शुल्क बेस्ट डीकंपोजर वितरित किया जा रहा है। 100 मिली. की बोतल को 200 लीटर पानी और 3 किलोग्राम गुड़ में मिलाकर 1 एकड़ खेत के लिए तैयार किया जा सकता है। इससे अवशेष तेजी के साथ नष्ट हो जाएगा।
बताया कि एक टन फसल धान का अवशेष जलाने से लगभग 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 23 किलोग्राम फास्फोरस आक्साइड, 25 किलो ग्राम पोटैशियम ऑक्साइड, 1.2 किलोग्राम सल्फर व 400 किलोग्राम कार्बन की क्षति होती है। पोषक तत्वों के नष्ट होने के अतिरिक्त मिट्टी के कुछ गुण जैसे भूमि तापमान, नमी उपलब्ध फास्फोरस एवं जैविक पदार्थ भी अत्यधिक प्रभावित होते हैं। इससे पर्यावरण एवं फसल उत्पादन दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसलिए कृषकों द्वारा फसल अवशेष का बेहतर प्रबंधन किया जाना चाहिए। इसके लिए उपयोगी यंत्रों एवं मशीनों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा इन यंत्रों को अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिले के 40 कृषकों को राज्य कृषि प्रबंध संस्थान रहमानखेडा द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन में प्रशिक्षण कराया जा चुका है। उन्होंने बताया कि पराली जलाने पर शासन द्वारा दो एकड़ तक की जोत वाले कृषकों से 2500, दो एकड़ से पांच एकड़ तक की जोत वाले कृषकों से 5 हजार, 5 एकड़ से अधिक जोत वाले कृषकों से 15 हजार रुपए अर्थदंड वसूलने का निर्देश है। ऐसे में किसान पराली जलाने से बचें।