इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष से पूछा कि जीडीए के होते हुए बिल्डर ने कैसे 134 फ्लैट अवैध रूप से बना लिए। कोर्ट ने फ्लैट निर्माण की निगरानी करने वाले अफसरों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने का आदेश देते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। कोर्ट ने कार्रवाई के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है और मामले की सुनवाई फरवरी में करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ ने मदन मोहन चौधरी की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
इसके पहले अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जीडीए के उपाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह कोर्ट के समक्ष पेश हुए और अपनी ओर से हलफनामा दाखिल किया। उपाध्यक्ष ने कोर्ट को बताया कि विवादित मामले में 536 फ्लैटों का नक्शा पास किया गया था। नक्शे में बदलाव करके बड़े फ्लैटों को छोटे फ्लैटों में तब्दील करके 134 अतिरिक्त फ्लैटों का निर्माण किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि फ्लैट निर्माण करने वाले बिल्डर ने संशोधित नक्शे को समायोजित करने के लिए जीडीए के समक्ष अर्जी दाखिल किया था लेकिन जीडीए ने उसे निरस्त कर दिया है।
इस पर बिल्डर ने यूपी सरकार के समक्ष पुनर्विचार अर्जी दाखिल की जो लंबित है। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ऐसे ही मामले में एक आदेश पारित किया है, जिसमें कहा गया है कि पुनर्विचार अर्जी लंबित होने पर बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती है। लिहाजा, बिल्डर के खिलाफ अभी कोई नहीं की जा सकी है। इस पर याची अधिवक्ता गौतम बघेल ने कहा कि लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार को ऐसे मामलों को निस्तारित करने के लिए चार सप्ताह की अवधि का समय तय किया है, लेकिन यूपी सरकार ऐसा नहीं कर सकी है। इस वजह से बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी है। पुनर्विचार अर्जी अभी लंबित है।
इसके बाद जीडीए उपाध्यक्ष ने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में कई बदलाव किए हैं और प्राधिकरण को पहली बार लाभ में पहुंचाया है। उन्होंने यह कहा कि मनमाने तरीके से बढ़ाए गए 134 फ्लैट की जानकारी उन्हें नहीं हो सकी। इस पर कोर्ट ने परियोजना की निगरानी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने और याची को अवमानना याचिका में यूपी सरकार को पक्षकार बनाए जाने का आदेश पारित किया।
मामला रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव से जुड़ा हुआ है। फ्लैटों की संख्या अधिक होने की वजह से एसोसिएशन का चुनाव नहीं हो सका। कुछ लोगों ने चुनाव कराने के लिए याचिका दाखिल की जिस पर बिल्डर द्वारा की गई कारस्तानी का पता चला। कोर्ट ने इस मामले में जीडीए वीसी को तलब करते हुए पूरे मामले में जानकारी मांगी थी।