यह परीक्षा शुरू से ही विवादों में रही। पहले आरोप लगे कि परीक्षा में कई अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट बदल दी गई हैं। अभ्यर्थियों से ओ-लेवल सर्टिफिकेट मांगे गए थे। यह आरोप भी लगे कि ओ-लेवल सर्टिफिकेट की जगह दूसरे प्रमाणपत्र स्वीकार किए गए। कुछ अभ्यर्थियों ने फर्जी अभिलेख लगाए और तमाम अभ्यर्थियों को टाइप टेस्ट में अनुचित लाभ पहुंचा गया। आरोप लगाए गए कि टाइप टेस्ट में फेल अभ्यर्थियों का भी चयन किया गया। सीबीआई जांच शुरू हुई तो तमाम अभ्यर्थियों ने सीबीआई के समक्ष अभिलेखीय साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। जांच के दौरान सीबीआई को गड़बड़ी के ठोस सुराग मिले, जिसके बाद सीबीआइ्र ने पीई दर्ज कर ली और अब मुकदमा दर्ज करने जा रही है।