रीता बहुगुणा जोशी के बेटे मयंक जोशी और अखिलेश यादव
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आखिरी चरण में पाला बदलने से भाजपा को झटका
पूरे चुनाव के दौरान चर्चा रही कि ब्राह्मण मतदाताओं का एक वर्ग भाजपा से नाराज है। ऐसे में आखिरी चरण के मतदान से दो दिन पहले मयंक के सपा में जाने से भाजपा को बड़ा झटका लगा है। वहीं डॉ.रीता जोशी का कहना है कि वह अब भी भाजपा में हैं।
रीता के प्रतिनिधि अभिषेक शुक्ला ने बताया कि इस समय वह त्रिपुरा में हैं। वहां रीता को मयंक के सपा में शामिल होने की सूचना मिली। इसके बाद उन्होंने स्पष्टीकरण जारी कर भाजपा एवं नेतृत्व के प्रति पूरी आस्था जताई। इसके अतिरिक्त उन्होंने किसी तरह की टिप्पणी से इंकार कर दिया।
Prayagraj News : सांसद रीता बहुगुणा जोशी अपने पुत्र मयंक जोशी के साथ।
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रीता को राज्यपाल बनाए जाने की उम्मीदों को झटका
डॉ.रीता बहुगुणा जोशी पहले ही घोषणा का चुकी हैं कि अब वह कोई चुनाव नहीं लडे़ंगी। इस घोषणा के बाद से ही चर्चा शुरू हो गई है कि उन्हें राज्यपाल बनाया जा सकता है। पार्टी सूत्र के अनुसार उन्होंने इसके लिए प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। हालांकि, अब मयंक के सपा में चले जाने से उनके प्रयासों को झटका लगने की बात कही जा रही है।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने मयंक जोशी का पार्टी में स्वागत किया।
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सपा ने चुना सही समय, दिया बड़ा संदेश
मयंक जोशी के सपा में शामिल होने के समय को लेकर भी काफी चर्चा है। इसे सपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बाह्मण मतदाताओं का एक वर्ग भाजपा से नाराज बताया जा रहा है। ऐसे में सपा शुरू से ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिश में जुटी है।
इसी क्रम में चौथे चरण के मतदान से पहले अखिलेश यादव ने मयंक से मुलाकात की और अब आखिरी चरण के मतदान से दो दिन पहले उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया। माना जा रहा है कि सपा इन तारीखों को चुना ताकि, डॉ.रीता जोशी के बेटे की भाजपा से नाराजगी को अधिक से अधिक भुनाया जा सके।