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यूपी : सूबे के 15 न्यायिक अधिकारियों पर हाईकोर्ट ने की कार्रवाई, 10 को दी गई समयपूर्व सेवानिवृत्ति

Wed, 01 Dec 2021 12:04 AM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज

सार

यह निर्णय बीते सप्ताह इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ बेंच के न्यायाधीशों की फुलकोर्ट बैठक में लिया गया। इनमें 11 अधिकारियों को नियम 56 सी के तहत निष्प्रयोज्य आंका गया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हाईकोर्ट प्रशासन ने प्रदेश के कई जिला न्यायालयों में कार्यरत 11 अपर जनपद न्यायाधीशों (एडीजे), दो जिला जज स्तर के और दो सीजेएम स्तर के सहित 15  न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। इनमें से 10 को समयपूर्व सेवानिवृत्ति दी गई है। जिसमे  आठ एडीजे और दो सीजेएम शामिल हैं। उनके अधिकार जब्त कर लिए गए हैं।

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यह निर्णय बीते सप्ताह इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ बेंच के न्यायाधीशों की फुलकोर्ट बैठक में लिया गया। इनमें 11 अधिकारियों को नियम 56 सी के तहत निष्प्रयोज्य आंका गया। ये सभी अपने आचरण और व्यवहार से विभाग की छवि को भी प्रभावित कर रहे थे। इन अधिकारियों में जिला जज स्तर के मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के एक पीठासीन अधिकारी के अलावा लखीमपुर, आगरा, कौशाम्बी, वाराणसी, हमीरपुर व उन्नाव में कार्यरत अपर जिला जज, कानपुर नगर के सीजेएम स्तर के एक अधिकारी, गोरखपुर की महिला अपर जिला जज को समय से पूर्व सेवानिवृत्त कर दिया गया है।

हाईकोर्ट में कार्यरत एक रजिस्ट्रार को काम पूरा न हो पाने कारण स्कैनिंग कमेटी ने इन्हें भी उस सूची में शामिल किया था, लेकिन उनके आचरण, व्यवहार और अच्छे न्यायिक अधिकारी होने की कारण उन्हें राहत प्रदान की गई है। एक जिला जज अवकाश ग्रहण करने कारण कार्यवाही से राहत पा गए। काफी समय से निलंबित चल रहे सुलतानपुर के एडीजे को भी राहत प्रदान की गई है।

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राज्य सरकार को भेजी जाएगी संस्तुति
जानकारों के मुताबिक जिन न्याययिक अधिकारियो पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया है उनकी संस्तुति राज्य सरकार को भेजी जाएगी। राज्य सरकार के अनुमोदन और राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद कार्रवाई पर अंतिम मुहर लगेगी।

संविधान के 235 अनुच्छेद में हाईकोर्ट को जिला न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों पर नियंत्रण रखने का अधिकार दिया गया है। पूर्व में भी हाईकोर्ट द्वारा न्याययिक अधिकारियों के विरुद्ध इस प्रकार की कार्रवाई की जा चुकी है। इस संदर्भ में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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