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यूपी विधानसभा चुनाव 2022 : मेजा के मतदाताओं ने हर दल को दिया मौका

Fri, 21 Jan 2022 06:32 PM IST
विनोद सिंह राहुल शर्मा, प्रयागराज

सार

यमुनापार की मेजा सीट में 1951 से 2017 तक कुल 17 चुनाव हो चुके हैं। 1985 तक इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस का वर्चस्व रहा। तब नौ में से सात बार कांग्रेस प्रत्याशी इस सीट को जीतने में कामयाब रहे, लेकिन इसके बाद कांग्रेस का इस सीट से पतन होना शुरू हो गया।
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भाजपा, कांग्रेस और सपा के चुनाव चिन्ह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रयागराज की मेजा विधानसभा एकमात्र ऐसी सीट है, जिसने सभी बड़े दलों को को मौका दिया है। यहां सीपीएम, कांग्रेस, जनता पार्टी, बसपा, समाजवादी पार्टी और भाजपा के विधायकों को जनता ने सेवा का मौका दिया है। बीते चार चुनाव की बात करें तो यहां हर बार नए दल के प्रत्याशी पर भी मतदाताओं ने भरोसा जताया है।

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यमुनापार की मेजा सीट में 1951 से 2017 तक कुल 17 चुनाव हो चुके हैं। 1985 तक इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस का वर्चस्व रहा। तब नौ में से सात बार कांग्रेस प्रत्याशी इस सीट को जीतने में कामयाब रहे, लेकिन इसके बाद कांग्रेस का इस सीट से पतन होना शुरू हो गया।

तब से हुए आठ चुनाव में कांग्रेस इस सीट पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी। 1985 के बाद हुए चुनाव में यहां से बसपा और सीपीएम ही ऐसे दल रहे हैं जिन्होंने दो-दो बार चुनाव जीते, जबकि जनता दल ने यहां 1989, जनता पार्टी ने 1991, सपा ने 2012 और भाजपा ने वर्ष 2017 में जीत दर्ज की। बसपा इस सीट से 1993 एवं 2007 में चुनाव जीत चुकी है, जबकि सीपीएम के रामकृपाल ने लगातार 1996 और 2002 के चुनाव में विजयी रहे।
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पिछले चुनाव में इस सीट पर पहली बार भाजपा का कमल खिलाने में नीलम करवरिया कामयाब हुईं। उन्होंने सपा के राम सेवक सिंह को तकरीबन 20 हजार मतों से शिकस्त दी थी। इसके साथ ही वह इस सीट से जीतने वालीं एक मात्र महिला विधायक भी हैं। 

मेजा सीट से पांच बार विधायक बन चुके हैं विश्राम दास
मेजा सीट से विश्राम दास के नाम सर्वाधिक पांच जीत है। कांग्रेस के टिकट पर वह इस सीट से पहली बार 1969 में निर्वाचित हुए। उसके बाद 1980, 1985, 1989 और 1991 में भी वह यह सीट जीते। हालांकि 1989 में वह जनता दल तो 1991 में जनता पार्टी से इस सीट पर निर्वाचित हुए। बसपा के राजबलि जैसल इस सीट से 1993 और 2007 में निर्वाचित हुए। 

पहले दो चुनाव में यहां से बने थे दो-दो विधायक
देश आजाद होने के बाद मेजा विधानसभा सीट पर पहला विधानसभा चुनाव 1951 में हुआ। तब इस सीट का नाम मेजा कम करछना साउथ था। उस चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर उक्त सीट से दो विधायक निर्वाचित हुए। यह दोनों ही कांग्रेस के रहे। इनके नाम मंगला प्रसाद एवं रघुनाथ प्रसाद रहे। इसके बाद 1957 के चुनाव में भी उक्त सीट से एक बार फिर दो विधायक जोखई और मंगला प्रसाद चुने गए। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर सालिगराम जायसवाल के नाम यहां सर्वाधिक 54.46 फीसदी मत पाने का रिकार्ड है। 
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1951 से अब तक चुने गए विधायक
वर्ष            विधायक            दल

2017        नीलम करवरिया            भाजपा
2012        गामा पांडेय        सपा
2007        राजबलि जैसल        बसपा
2002        रामकृपाल        सीपीएम
1996        रामकृपाल        सीपीएम
1993        राजबलि जैसल        बसपा
1991        विश्राम दास        जनता पार्टी
1989        विश्राम दास        जनता दल
1985        विश्राम दास        कांग्रेस
1980        विश्राम दास        कांग्रेस
1977        जवाहर लाल        जनता पार्टी
1974        रामदेव        कांग्रेस
1969        विश्राम दास        कांग्रेस
1967        बी वीर        कांग्रेस
1962        सालिगराम जायसवाल        पीएसपी
1957        जोखई और मंगला प्रसाद        कांग्रेस
1951        मंगला प्रसाद और रघुनाथ प्रसाद        कांग्रेस
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