महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्रपुरी के नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद अपने साथ सात अखाड़ों का बहुमत होने का दावा कर रही है। इसमें उनके साथ महानिर्वाणी अखाड़ा, अटल अखाड़ा, बड़ा उदासीन, निर्मल व बैरागियों के तीन अखाड़े शामिल हैं। जबकि, निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्रपुरी महाराज के नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद भी अपने साथ आठ अखाड़ों के बहुमत का दावा किया है।
निरंजनी के सचिव महंत रवींद्र पुरी जिस धड़े के अध्यक्ष बने हैं, उनके मुताबिक उनके साथ जूना, अग्नि, आवाहन आनंद, निरंजनी, निर्मल, नया उदासीन व बैरागी का निर्मोही अखाड़ा उनके साथ है। इस हिसाब से उनके पास बहुमत का आंकड़ा आठ हो जाता है। ऐसे में स्थिति असहज हो गई है।
अखाड़ा परिषद के असली अध्यक्ष महानिर्वाणी के महंत रवींद्र पुरी: देवेंद्र शास्त्री
दारागंज के निरंजनी अखाड़े में हुए अखाड़ा परिषद के चुनाव में केवल छह अखाड़ों ने ही हिस्सा लिया है। प्रयागराज में हुई बैठक में न तो निर्मल अखाड़े के रेशम सिंह को मतदान करने का अधिकार था और न ही बैरागी निर्मोही अखाड़े के मदन मोहन दास को। ऐसे में संख्या बल छह ही रह जाता है। यह कहना है निर्मल अखाड़े के सचिव महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री का।
उनका कहना है कि महानिर्वाणी के सचिव महंत रवींद्र पुरी की अखाड़ा परिषद के असली अध्यक्ष हैं। पूर्व महामंत्री हरि गिरि की ओर से प्रयागराज में बुलाई गई बैठक में फर्जी संतों के आधार पर बहुमत का झूठा दावा किया गया है। नियम के विपरीत एजेंडा और बिना अध्यक्ष की मौजूदगी के बैठक में छह अखाड़ों की ओर से किया गया निरंजनी के सचिव रवींद्र पुरी का अध्यक्ष के पद पर मनोनयन अवैधानिक है।
हरिद्वार में सात अखाड़ों ने बहुमत के आधार पर मुझे अध्यक्ष चुना है। मैंने संन्यासी, उदासी, बैरागी और वैष्णव सभी चारों परंपराओं के संतों को मिलाकर कार्यकारिणी गठित की है। इसमें किसी तरह का मतभेद नहीं है। मेरे नेतृत्व वाली परिषद को ही कुंभ कराने का अधिकार होगा। महंत रवींद्र पुरी, महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव व अध्यक्ष अखाड़ा परिषद।