याची की ओर से तर्क दिया गया कि घटना एफआईआर दर्ज किए जाने की तारीख पांच जून 2022 से छह माह पूर्व की है। केस डायरी के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि दौरान विवेचना विवेचक द्वारा न तो अभियुक्त के मोबाइल का विवरण और न ही पीड़िता के मोबाइल के विवरण का उल्लेख किया गया है।
मोबाइल से पीड़िता को अश्लील कमेंट व मैसेज भेजने के आरोपी को सत्र न्यायालय ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने उसे 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और दो प्रतिभूति केसाथ रिहा करने का आदेश दिया। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश कृष्ण कुमार ने आरोपित आशीष खरे के अधिवक्ता मनीष खन्ना तथा सहायक शासकीय अधिवक्ता के तर्कों को सुनने एवं पुलिस द्वारा केस डायरी के अवलोकन के बाद दिया। आरोपी को कुछ दिन पूर्व बाथरूम के शावर में कैमरा लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
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याची की ओर से तर्क दिया गया कि घटना एफआईआर दर्ज किए जाने की तारीख पांच जून 2022 से छह माह पूर्व की है। केस डायरी के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि दौरान विवेचना विवेचक द्वारा न तो अभियुक्त के मोबाइल का विवरण और न ही पीड़िता के मोबाइल के विवरण का उल्लेख किया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पत्रों से यह भी स्पष्ट होता है कि आरोपित जेल में बंद है।
प्रकरण में जमानत पर रिहा किए जाने का पर्याप्त आधार है। याची पर गोरखपुर जिले की स्थायी निवासी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाली एक छात्रा ने पांच जून 2022 को कर्नलगंज थाने में आरोपी आशीष खरे के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि आरोपी अश्लील कमेंट व मैसेज लिखकर भेजता था।