फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ram Mandir : वनवास के समय प्रयागराज पहुंचे थे श्रीराम, मां सीता व लक्ष्मण संग अक्षयवट के नीचे किया था विश्राम

Fri, 05 Jan 2024 12:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

सबके आराध्य प्रभु श्रीराम द्वादश माधव की नगरी में खुद आराधना कर चुके हैं। यमुना तट पर मनकामेश्वर में जहां भगवान राम के चरण पड़े, वहां अब दुनिया उमड़ती है। मान्यता है कि संगमनगरी में मनकामेश्वर के दर्शन से हर कामनाएं पूरी हो जाती हैं।
विज्ञापन
अक्षय वट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जिनकी महिमा पूरे जगत ने गाई और जिनके नाम स्मरण से जीवन सफल हो जाने की धारणा रही है, वह भी प्रयागराज में मनकामेश्वर की महिमा गान कर चुके हैं। पुराणों में उल्लेख है कि वन गमन के दौरान प्रभु श्रीराम ने अक्षयवट से पहले मनकामेश्वर में पड़ाव डाला था। वहां सीता के साथ भगवान राम ने मनकामेश्वर महादेव की आराधना की थी। महाकुंभ के तहत इस तीर्थ को आध्यात्मिक पर्यटन के मानचित्र पर उभारने की शासन की योजना है।

विज्ञापन


सबके आराध्य प्रभु श्रीराम द्वादश माधव की नगरी में खुद आराधना कर चुके हैं। यमुना तट पर मनकामेश्वर में जहां भगवान राम के चरण पड़े, वहां अब दुनिया उमड़ती है। मान्यता है कि संगमनगरी में मनकामेश्वर के दर्शन से हर कामनाएं पूरी हो जाती हैं। पौराणिक मान्यता है कि यज्ञभूमि पर कामदेव को भस्म करने के बाद भगवान शिव ने यमुना तट पर भक्तों की कामना पूरी करने के लिए प्रवास किया। तभी भगवान शिव यहां यमुना तट पर मनकामेश्वर के रूप में महादेव विराजमान हैं।

विज्ञापन

पद्मपुराण में वर्णित है कि वन गमन के दौरान प्रभु श्रीराम ने अक्षयवट दर्शन से पहले मनकामेश्वर की आराधना की थी। कामना पूर्ति के लिए जलाभिषेक और दर्शन के लिए यहां भक्तों की भीड़ हर रोज उमड़ती है। स्कंद पुराण और प्रयाग महात्म्य में भी मनकामेश्वर महादेव का उल्लेख है। पुराणों के अनुसार अक्षयवट के पश्चिम में पिशाच मोचन मंदिर के पास यमुना के किनारे मनकामेश्वर तीर्थ है। यहां कामेश्वरी के रूप में मां पार्वती के अलावा भैरव, यक्ष, किन्नर भी विराजमान है।

कामेश्वर और कामेश्वरी का तीर्थ होने के साथ ही श्रीविद्या की तांत्रिक साधना का भी यह केंद्र रहा है। मनकामेश्वर मंदिर के परिसर में ऋण मुक्तेश्वर और सिद्धेश्वर महादेव विराजमान हैं। इन देव देवताओं और तीर्थों के दर्शन के बाद प्रभु श्रीराम वन गमन के लिए आगे बढ़े थे।

त्रेता में जब भगवान राम को वनवास मिला तब अयोध्या से वह माता जानकी और लक्ष्मण के साथ अक्षयवट के नीचे विश्राम किया था । यहां से प्रस्थान से पहले उन्होंने मनकामेश्वर की आराधना की थी। - श्रीधरानंद ब्रह्मचारी, मंदिर के व्यवस्थापक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें