पद्मपुराण में वर्णित है कि वन गमन के दौरान प्रभु श्रीराम ने अक्षयवट दर्शन से पहले मनकामेश्वर की आराधना की थी। कामना पूर्ति के लिए जलाभिषेक और दर्शन के लिए यहां भक्तों की भीड़ हर रोज उमड़ती है। स्कंद पुराण और प्रयाग महात्म्य में भी मनकामेश्वर महादेव का उल्लेख है। पुराणों के अनुसार अक्षयवट के पश्चिम में पिशाच मोचन मंदिर के पास यमुना के किनारे मनकामेश्वर तीर्थ है। यहां कामेश्वरी के रूप में मां पार्वती के अलावा भैरव, यक्ष, किन्नर भी विराजमान है।
कामेश्वर और कामेश्वरी का तीर्थ होने के साथ ही श्रीविद्या की तांत्रिक साधना का भी यह केंद्र रहा है। मनकामेश्वर मंदिर के परिसर में ऋण मुक्तेश्वर और सिद्धेश्वर महादेव विराजमान हैं। इन देव देवताओं और तीर्थों के दर्शन के बाद प्रभु श्रीराम वन गमन के लिए आगे बढ़े थे।
त्रेता में जब भगवान राम को वनवास मिला तब अयोध्या से वह माता जानकी और लक्ष्मण के साथ अक्षयवट के नीचे विश्राम किया था । यहां से प्रस्थान से पहले उन्होंने मनकामेश्वर की आराधना की थी। - श्रीधरानंद ब्रह्मचारी, मंदिर के व्यवस्थापक