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Ram Mandir : कार सेवकों के लिए हर घर से ली जाती थी आठ-आठ रोटी, दो सगे भाइयों का योगदान रहा अनुकरणीय

Fri, 05 Jan 2024 12:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों की सेवा के लिए इन दोनों भाइयों ने शहरियों को जोड़ने के लिए हर घर से आठ रोटी लेने का लक्ष्य निर्धारित किया। इसका प्रभाव यह रहा कि 1992 के आंदोलन के दौरान हजारों शहरियों ने दोनों भाइयों के नेतृत्व में बढ़चढ़ कर कारसेवकों के लिए रोटियां दीं।
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आयोध्या आंदोलन के दौरान डॉ. मुरली मनोहर जोशी के साथ भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राघवेंद्र प्रसाद। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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राम मंदिर आंदोलन को सफल बनाने में जहां एक ओर अशोक सिंहल जैसे व्यक्तित्व का नेतृत्व था, वहीं दूसरी ओर नेपथ्य में रहकर अतुलनीय योगदान करने वाले भी थे। ऐसे लोग भले ही नेपथ्य में थे, पर उनका अवदान अप्रतिम है। ऐसे नायकों में दो सगे भाइयों स्वर्गीय राघवेंद्र मिश्र और राजेंद्र प्रसाद मिश्र का नाम उल्लेखनीय है।

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मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों की सेवा के लिए इन दोनों भाइयों ने शहरियों को जोड़ने के लिए हर घर से आठ रोटी लेने का लक्ष्य निर्धारित किया। इसका प्रभाव यह रहा कि 1992 के आंदोलन के दौरान हजारों शहरियों ने दोनों भाइयों के नेतृत्व में बढ़चढ़ कर कारसेवकों के लिए रोटियां दीं। प्रयागराज के साउथ मलाका निवासी स्वर्गीय राघवेंद्र मिश्र जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे।

वह भाजपा के जिलाध्यक्ष भी रहे। उनके भतीजे एवं एंग्लो बंगाली के शिक्षक रविंद्र मिश्र बताते हैं, उस दौरान बाबू जी ( राघवेंद्र मिश्र) दिन-रात कारसेवकों की सेवा में जुटे रहते थे। तब दक्षिण भारत, महाराष्ट्र, गुजरात से आने वाले तमाम कारसेवक प्रयागराज होकर ही अयोध्या के लिए रवाना हो रहे थे। दक्षिण भारत से आने वाले स्वयंसेवकों के समक्ष भाषाई संकट था। प्रयागराज में प्रशासन सभी को अयोध्या जाने से रोक रहा था। इस वजह से यहां हजारों कारसेवकों का जमावड़ा था।

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ऐसे में सभी के समक्ष भोजन पहुंचाने की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं ने राघवेंद्र मिश्र और वर्तमान में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ दक्षिणी क्षेत्र के संचालक राजेंद्र प्रसाद मिश्र को सौंप दी। इस दौरान शहरियों से कार सेवकों के लिए हर घर से आठ रोटी दिए जाने की अपील की गई। राजेंद्र प्रसाद मिश्र कहते हैं, अपील का ऐसा प्रभाव रहा कि पूरे सेवाभाव के साथ लोग रोटी देने के लिए उमड़ पड़े।

तब तमाम परेशानियां भी आईं, लेकिन उत्साह और उमंग के आगे कुछ पता ही नहीं चला। उस आंदोलन में न जाने कितने कारसेवकों ने अपनी जान गंवा दी। अब अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा की पहल पर कलेजे को ठंडक मिली। कहा, आज मेरे बड़े भाई स्वर्गीय राघवेंद्र मिश्र भले ही जीवित नहीं हैं, लेकिन राम मंदिर निर्माण के धन संग्रह अभियान में उनका भी अनुकरयीय योगदान रहा। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ.मुरली मनोहर जोशी भी इस अभियान के कायल हुए। आंदोलन के दौरान उनका सानिध्य भी प्राप्त होता रहा।
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राममय होगा बसों का सफर, सफर में भजन और रामधुन सुनेंगे यात्री

अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर यूपी रोडवेज ने भी अपनी तैयारी कर ली है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर बसों में अब राममय सफर होगा। बृहस्पतिवार को ही प्रमुख सचिव परिवहन एल वेंकटेश्वर लू की अध्यक्षता में परिवहन निगम एवं परिवहन विभाग के सभी क्षेत्रीय प्रबंधक, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हुई। इसमें उन्होंने सभी अफसरों को निर्देश दिया कि परिवहन निगम की ओर से संचालित ऐसी बसें, जिसमें उद्घोषणा यंत्र/म्यूजिक सिस्टम लगा हो, उनमें भजन एवं रामधुन बजाई जाए। बैठक में प्रयागराज के क्षेत्रीय प्रबंधक एमके त्रिवेदी ने भी शिरकत की। रोडवेज के सेवा प्रबंधक मुकेश कुमार ने बताया कि जिन बसों में म्यूजिक सिस्टम है, सचिव परिवहन के निर्देशानुसार भजन एवं रामधुन बजाई जाएगी। 
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