राजू पाल की हत्या में भी शामिल था इसरार
इसके बाद 2002 में ही उसने बम-गोली चलाकर अपहरण, लूट व हत्या के प्रयास की वारदात को अंजाम दिया तो लोग उससे खौफ खाने लगे। उसकी लगातार आपराधिक वारदातों में संलिप्तता को देखते हुए पुलिस ने उस पर गुंडा एक्ट लगाया। 2005 में राजू पाल हत्याकांड में अतीक-अशरफ व गैंग के अन्य सदस्याें के साथ वह भी शामिल हुआ। इसके बाद अतीक के इशारे पर वह कचहरी परिसर में राजूपाल हत्याकांड के चश्मदीद उमेश पाल को अगवा कर जबरन बयान बदलवाने की घटना में भी शामिल हुआ।
शुक्रवार को सजा सुनाए जाने के दौरान वह कोर्ट में मौजूद नहीं था। ऐसे में उसके खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी किया गया। इधर प्रयागराज पुलिस भी उसकी तलाश में जुट गई है। पुलिसकर्मी शनिवार को नीवा से लेकर मरियाडीह तक उसके बारे में जानकारी जुटाने में लगे रहे। फिलहाल देर रात तक उसका कोई पता नहीं चल सका था।