सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य/विशेष चयन) परीक्षा-2019 के तहत सहायक अभियंता (एई) भर्ती में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। पिछले साल 13 दिसंबर को हुई लिखित परीक्षा में एक ही रोल नंबर की दो कॉपियां मिलीं थीं। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने इसकी जांच कराई तो इसमें अभ्यर्थी समेत संबंधित परीक्षा केंद्र के पर्यवेक्षक, कक्ष निरीक्षक भी प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विद्यालय की मान्यता समाप्त करने की संस्तुति की है। साथ ही केंद्र पर्यवेक्षक, कक्ष निरीक्षक एवं अभ्यर्थी के खिलाफ भी कार्रवाई की है। आयोग की ओर से सिविल लाइंस थाने में एफआईआर पहले ही दर्ज कराई जा चुकी है।
प्रयागराज। सम्मिलत राज्य अभियंत्रण सेवा परीक्षा-2019 में एक ही रोल नंबर के दो उत्तर पत्रक मिलने के बाद पूरी परीक्षा ही विवादों में घिर गई है। सील्ड पैकेट में गलती से एक ही रोल नंबर की दो कॉपियां रखे जाने से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने मामला तो पकड़ लिया, लेकिन अब इस बात की आशंका भी जताई जा रही है कि ऐसे और भी मामले रहे होंगे, जो पकड़ में नहीं अए। फिलहाल आयोग की ओर से बीते 26 जून को एई के 580 पदों पर चयनित सभी अभ्यर्थियों की नियुक्ति की संस्तुति शासन को भेजी जा चुकी है।
जिस तरह से एक ही रोल नंबर की दो कॉपियां पाई गईं हैं,ख्उससे यही अनुमान लगाया जा रहा है कि एक कॉपी अभ्यर्थी के पास रही होगी और दूसरी सॉल्वर ने लिखी। ऐन वक्त पर कॉपी बदलने की याजना रही होगी, लेकिन गलती से दोनों कॉपियों एक ही पैकेट में रखकर आयोग को भेज दी गईं। ऐसे में परीक्षा केंद्रों में सॉल्वर गैंग के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं और अब पूरी परीक्षा ही विवादों से घिर गई है। आयोग ने सहायक अभियंता के 648 पदों के लिए सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा परीक्षा आयोजित की थी।
यूपीपीएससी ने इस वर्ष 26 मार्च को परीक्षा का अंतिम चयन परिणाम जारी किया, जिसमें 580 अभ्यर्थियों को चयनित घोषित किया गया, जबकि 68 पद योग्य अभ्यर्थी न मिलने के कारण खाली रह गए। परीक्षा के बाद काफी दिनों तक आयोग ने चयनित अभ्यर्थियों की फाइलें शासन के पास नहीं भेजीं, क्योंकि इस दौरान जांच चल रही थी। सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद 25 जून को चयनित अभ्यर्थियों की फाइलें नियुक्ति की संस्तुति के साथ शासन को भेजी गईं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय और मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय ने इस पूरे मामले में आयोग कर्मियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।