इलाहाबाद जंक्शन पर अवैध वेंडरों की रोकथाम के लिए रेल सुरक्षा बल की सीआईबी टीम अभियान चलाकर 40 अवैध वेंडरों को पकड़ा। खास बात यह रही कि सीआईबी (अपराध शाखा) टीम में शामिल जवानों की भी की संख्या 40 ही रही। हालांकि सीआईबी की इस कार्रवाई पर तमाम सवाल भी खड़े हो गए हैं। आरोप है कि सीआईबी की टीम ने जिन वेंडरों को पकड़ा, उसमें से कुछ वैध वेंडर भी हैं, जो जंक्शन स्थित फूड प्लाजा नीलम और आरके फूड के कर्मचारी है। दोनों ही फूड प्लाजा की ओर से आरपीएफ की कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। इस मामले में डीआरएम इलाहाबाद अमिताभ ने जांच करवाने की बात कही है।
उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय के प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त (पीसीएससी) एसएन पांडेय के निर्देश पर आरपीएफ सीआईबी के चार निरीक्षक अर्जुन यादव, एसएन पाटीदार, अविनाश कुमार एवं रजनीश राय के नेतृत्व में 40 जवानों ने जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक से दस तक छापामारी की कार्रवाई की। इस दौरान जंक्शन पर खड़ी नवतनवा एक्सप्रेस, सिकंदराबाद एक्सप्रेस, महाबोधि एक्सप्रेस को भी खंगाला गया। प्लेटफार्म और ट्रेनों से कुल 40 अवैध वेंडर पकड़ने का आरपीएफ ने दावा किया। सभी के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत मुकदमा भी पंजीकृत किया गया।
वहीं, दूसरी ओर आरपीएफ की इस कार्रवाई पर सवालों के घेरे में भी आ गई है। दरअसल, आरपीएफ ने कुछ वेंडर ऐसे भी पकड़े हैं जो प्लेटफार्म नंबर पर एक पर स्थित नीलम और आरके फूड के यहां कार्यरत है। नीलम फूड के सुरेश कुमार मिश्र और आरके फूड जयंती प्रसाद की ओर से आरपीएफ की कार्रवाई आपत्ति जताई गई है। कहा गया है कि आनन फानन में आरपीएफ इन दोनों फूड प्लाजा के वैध कर्मचारियों को ही उठाकर ले गई।
नीलम फूड के सुरेश मिश्र की ओर से कहा गया है कि पांच लड़के जिनका मेडिकल अभी प्रोसेस में है वह किचन में खाना खा रहे थे। उन्हें किचन से ही आरपीएफ ले गई। इसी तरह आरके फूड की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि उनके यहां बर्तन मांजने और सफाई कार्य में लगे संतोष, संजय, ललित आदि को आरपीएफ पकड़कर ले गई है। हालांकि चर्चा इस बात की भी है कि आरपीएफ ने कुल 50 लोगों को पकड़ा था, उसमें से दस को बाद में छोड़ दिया गया था।
सीसीटीवी में कैद है पूरा वाकया
आरपीएफ द्वारा शनिवार की रात अवैध वेंडरों के खिलाफ की गई कार्रवाई नीलम और आरके फूड के सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुई है। दोनों ही फूड प्लाजा की ओर से कहा गया है कि उनके यहां काम करने वाले कर्मचारियों को किस तरह से उठाया गया है वह सब सीसीटीवी कैमरे में कैद है। कहा गया है कि आरपीएफ किसी भी कर्मचारी का मेडिकल चेक नहीं कर सकती। ये अधिकार रेलवे के स्वास्थ्य विभाग को ही है।
‘आरपीएफ सीआईबी टीम ने कार्रवाई की है। अगर कोई वेंडर अपने को वैध बता रहा है तो वह अपने सारे कागजात मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर सकता है। जंक्शन पर अवैध वेंडरों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।’
00 एसएन पांडेय, पीसीएससी, आरपीएफ उत्तर मध्य रेलवे।
‘अवैध के साथ अगर किसी वैध वेंडर को भी पकड़ा गया तो निश्चित ही यह गंभीर बात है। इस मामले में विभागीय जांच करवाई जाएगी।
’अमिताभ, डीआरएम, इलाहाबाद मंडल।