चेतावनी, निंदा जैसी कार्रवाई का कर्मचारियों के प्रमोशन पर क्या असर पड़ेगा, इस बाबत केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की ओर से स्पष्टीकरण जारी किए जाने के बाद नया विवाद पैदा हो गया है। डीओपीटी ने कहा है कि निंदा को पेनाल्टी माना जाएगा और प्रोन्नति पर उसका असर पड़ेगा, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया है कि इसकी अवधि क्या होगी। ऐसे में कर्मचारियों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
सरकारी नौकरी में निंदा, चेतावनी जैसी सजाओं में सबसे छोटी सजा निंदा मानी जाती है, लेकिन अब यही सजा प्रोन्नति में बाधा बनेगी। डीओपीटी की ओर से जारी एक स्पष्टीकरण में कहा गया है कि चेतावनी आदि को पेनाल्टी न माना जाए लेकिन कर्मचारी के खिलाफ की गई निंदा की कार्रवाई को पेनाल्टी माना जाएगा। आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किसी कर्मचारी की निंदा की जाती है तो इसकी मियाद क्या होगी। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि इस स्पष्टीकरण में विसंगति है।
सरकार को इसे स्पष्ट करना चाहिए, वरना कर्मचारियों को नुकसान होगा और सबसे छोटी सजा कर्मचारियों की प्रोन्नति में बाधा बनेगी। आल इंडिया ऑडिट एंड एकाउंट एसोसिएशन के पूर्व सहायक महासचिव हरिशंकर तिवारी का कहना है कि प्रोन्नति पर चेतावनी, निंदा जैसी कार्रवाई के प्रभाव को लेकर जारी किया गया स्पष्टीकरण उलझाने वाला है। अगर किसी कर्मचारी की निंदा की जाती है और दो साल बाद उसका प्रमोशन होना है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि निंदा की मियाद क्या होगी। स्थिति स्पष्ट न होने पर यह पेनाल्टी प्रमोशन में बाधा बनेगी।