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प्रियंका गांधी ने मंदिर-मंदिर टेका माथा

Tue, 19 Mar 2019 12:46 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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priyanka - फोटो : प्रयागराज
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प्रदेश में प्रियंका गांधी के दौरे के साथ कांग्रेस की चुनावी रणनीति धरातल पर उतरने लगी है। प्रयागराज के संगम में बोट पर सवार प्रियंका ने मां गंगा की बेटी के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश की तो मंदिर-मंदिर माथा भी टेका। राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई राहुल गांधी के बाद प्रियंका ने भी साफ्ट हिंदुत्व के एजेंडे का कार्ड खेला। साथ ही कुंभ में न आ पाने की भरपाई करने की कोशिश की।
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2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में घोषणा की थी कि ‘मां गंगा ने बुलाया है।’ वहीं 2019 के चुनाव से पहले कुंभ तथा संगम प्रतीकों की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरी कैबिनेट के साथ संगम में डुबकी लगाई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगम स्नान के बाद सफाईकर्मियों के चरण पखार कर हिंदुत्व के एजेंडे के साथ कई मोर्चों को साधा। प्रयागराज से वाराणसी के लिए बोट पर सवार होकर निकलीं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका इन सभी सियासी बिंदुओं का जवाब देती नजर आईं। तीन दिन के चुनावी सफर के लिए संगम तट पर बोट पर सवार होते ही उनके साथ ‘गंगा की बेटी’ का नाम भी जुड़ गया।

हरे रंग की साड़ी में भारत की बेटी नजर आ रहीं प्रियंका ने पूरी श्रद्धा से संगम पूजन किया। संगम तट पर पूजन के दौरान वह घाट पर बैठ गईं और लहरों को स्पर्श करते हुए पुष्प और दीप अर्पित कर मां गंगा का आशीर्वाद लिया। फिर अक्षयवट और बड़े हनुमानजी का दर्शन किया। इस दौरान वह पूरी तरह से भक्ति भाव में डूबी नजर आईं तो उनके साथ भगवा वस्त्र में सांसद और बहराइच से कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री बाई फूले भी रहीं। फिर विशेष तरीके से सजे बोट पर सवार होकर वह मनैया घाट पहुंची और वहां भी दुर्गा मंदिर में माथा टेका।
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वहां से दुमदुमा (सैदाबाद) होते हुए सिरसा पहुंचीं। वहां भगवान श्रीनाथबाबा का आशीर्वाद लेने के बाद वह लाक्षागृह पहुंचीं। यहां से वह उस सीतामढ़ी पहुंचीं जिसे लेकर मान्यता है कि यहीं सीता धरती में समाईं थीं। पहले दिन का यह आखिरी उनका आखिरी पड़ाव था। लेकिन, मंगलवार को गंगा में जल मार्ग से शुरू चुनावी सफर विंध्याचल और चुनार तक जाएगा, तो बुधवार बाबा भोलेनाथ के आशीर्वाद के साथ प्रधानमंत्री के चुनावी क्षेत्र वाराणसी में खत्म होगा। राजनीति के जानकारों का कहना है कि अल्पसंख्यक वर्ग भी मान चुका है कि प्रतीकों की इस राजनीति में साफ्ट हिंदुत्व को स्वीकार करना होगा और अब यह कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है, जिसकी अगुवाई करने वाले में खुद प्रियंका गांधी भी हैं। 
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