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गंगा की धार पर सवार प्रियंका का गठबंधन पर मौन वार

Tue, 19 Mar 2019 12:37 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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priyanka - फोटो : प्रयागराज
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गंगा की धारा के साथ प्रयागराज के संगम से वाराणसी तक के चुनावी सफर पर निकलीं राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी कांग्रेस को दिल्ली के कितना करीब पहुंचा पाती हैं यह तो 23 मई को आने वाले नतीजे तय करेंगे लेकिन उनकी बोट की सवारी से सपा और बसपा के नेताओं में खलबली है। पूरे दौरे के दौरान प्रियंका सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर रहीं लेकिन अनुसूचित जातियों, मुस्लिमों खासतौर पर, पिछड़ों को साधकर उन्होंने गठबंधन की चुनौती भी बढ़ा दी। बसपा सुप्रीमो मायावती के ट्विट और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान से भी स्पष्ट है कि उन्हें प्रियंका का यह दौरा रास नहीं आ रहा। पूरे दौरे के दौरान प्रियंका की नजर प्रधानमंत्री के ‘सम्मान’ की सियासत पर भी रही। सुरक्षा की बंदिशों को पार करके वह लोगों के बीच पहुंचती रहीं तथा उनके साथ सीधा संवाद स्थापित किया।
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प्रियंका गांधी ने संगम से वाराणसी तक बोट की सवारी चुनकर एक साथ कई मोर्चों को साधने की कोशिश की है। इस दौरे के अंतर्गत फूलपुर, इलाहाबाद, भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली आदि संसदीय क्षेत्र ही आ रहे हैं लेकिन इसका सियासी संदेश जाति की राजनीति से प्रभावित हर लोकसभा सीट पर छोड़ने की कोशिश की। गंगा के किनारे मल्लाह, केवल, कश्यप, बिंद जातियों की प्रभावी संख्या है तो सब्जी की खेती से जीविका पालने वाले खटिक, सोनकरों तथा अन्य पिछड़ी और अनुसूचित जातियों की बड़ी आबादी है। इनके अलावा यादवों और मुस्लिमों का डेरी उद्योग भी गंगा नदी के किनारे फल फूल रहा है।

गंगा के किनारे का अधिकृत तौर पर कोई जातिय आंकड़ा तो नहीं है लेकिन राजनीतिक दलों ने अनुमानित आंकड़ें तैयार किए हैं। उनके अनुसार गंगा के किनारे 50 फीसदी से अधिक आबादी पिछड़ों और मुस्लिमों की है। इनके अलावा अनुसूचित जातियों की बड़ी आबादी है। इस दौरे के दौरान प्रियंका की नजर कभी कांग्रेस का मूल आधार रहे इन वर्गों पर है। सासंद सावित्री बाई फूले को साथ रखकर तथा मुस्लिमों के बीच पहुंचकर उन्होंने इस सियासत को और धार दी, जो अब बसपा और सपा का आधार माना जाता है। इस दौरान वह महिलाओं, युवाओं से पूरी तरह से घुलीमिली नजर आईं।
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घर से जूस लेकर आई एक महिला को एसपीजी के जवान ने रोका तो प्रियंका बुला लिया और जूस पिया। वह आधा जूस पीकर ही गिलास लौटा रहीं थीं लेकिन महिला के आंखों की चमक निहारते हुए फिर गिलास ले लिया और पूरा जूए पी गईं। उन्होंने युवतियों को गले लगाया तो बच्चिों को खुद से चिपकाकर दुलारा भी। सीधे बातचीत का सिलसिला शुरू कर उन्होंने यह भी जताया कि वह उनके बीच की हैं और इलाहाबाद ही उनका मायका है। प्रियंका का यह रूप लोगों को आकर्षित कर रहा था लेकिन भाजपा के साथ गठबंधन के नेताओं की चिंता भी बढ़ा रहा था। भले ही वह ‘गठबंधन’ पर पूरी तरह से मौन रहीं।

प्रयागराज के दौरे पर्र आइं प्रियंका को ज्ञापन सौंपकर सपा कार्यकर्ताओं ने आंनद भवन में प्रवेश तथा अन्य शुल्क न लिए जाने की मांग की। शिव यादव की अगुवाई में पहुंचे कार्यकर्ताओं का कहना था कि 70 रुपये टिकट लगने की वजह से आम लोग देश के इतिहास और महानायकों के बारे में जानने से वंचित रह जा रहे हैं। उन्होंने समाज सेवी संस्थानों, छात्र-छात्राओं को मुफ्त प्रवेश दिए जाने की मांग की। प्रियंका गांधी ने भी उन्हें मांग पूरी करने का आश्वासन दिया। ज्ञापन देने वालों में मोहित यादव, मोहित पांडेय, रबी यादव, रक्षामंत्री यादव, बृजेश विश्वकर्मा, सुनील यादव आदि शामिल रहे।
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