Prayagraj News : इलाहाबाद विवि में स्वर्णिम विजय मशाल का स्वागत करतीं कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव।
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प्रधानमंत्री द्वारा प्रज्ज्वलित स्वर्णिम विजय मशाल सोमवार शाम साढ़े पांच बजे 134 साल पुराने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विजयनगरम हाल पहुंची। वहां यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। विशिष्ट सेवा मेडल प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल एस. मोहन ने यह मशाल कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव को सौंपी। जिसे कुलपति ने विजयनगरम हाल के सामने स्थापित किया ।
लेफ्टिनेंट जनरल एस. मोहन ने कहा कि वह इस विजय मशाल को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लाकर गर्व की अनुभूति कर रहे हैं। उन्होंने स्वर्णिम विजय वर्ष 2021 की चर्चा करते हुए कहा कि 1971 के युद्ध के पश्चात भारतीय सेना ने अपनी कीर्ति की अमर छाप छोड़ी। कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने वर्ष 1971 के उन पलों को याद करते हुए कहा कि उस वक्त वह काफी छोटी थीं, लेकिन युद्ध की विभीषिका भूलती नहीं, जब पूरे शहर में ब्लैक आउट हो जाया करता था।
सायरन की आवाज सुनाई देती थी और जनजीवन रुक जाता था। 1971 का युद्ध भारतीय सेना के इतिहास में ही नहीं बल्कि विश्व सैन्य इतिहास में एक खास स्थान रखता है। कुलपति ने कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला के बलिदान का भी जिक्र किया।
इस मौके पर आर्मी के सिंफनी बैंड ने कई ओजपूर्ण गानों की धुन बजाई गई । जिनमें कदम कदम बढ़ाएगा, वंदेमातरम प्रमुख थे। संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ और ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ जैसे भावपूर्ण गीतों की प्रस्तुति दी। कवि श्लेष गौतम ने देशभक्ति कविता का पाठ किया और प्रो. राजाराम यादव ने ‘जब सारी दुनिया सोती थी’ कविता का पाठ किया। शाम सात बजे सेना के वरिष्ठ अधिकारी विजय मशाल के साथ लौट गए । कार्यक्रम का संचालन डॉ. जया कपूर ने किया।