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प्रयागराज : चार रैक डीएपी की मांग, पहुंचा मात्र डेढ़ रैक

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चार रैक डीएपी की मांग, पहुंचा डेढ़ रैक
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0 खाद आने से किसानों को फिलहाल राहत, 80 प्रतिशत आपूर्ति गंगापार में
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। डीएपी की कमी से परेशान किसानों के लिए फिलहाल राहत की बात है। डेढ़ रैक यानि, करीब 28 मीट्रिक टन डीएपी आ गई है। हालांकि, अब भी दो रैक से अधिक डीएपी की जरूरत होगी। इसके लिए शासन को लिखा जाएगा।
आलू और सरसों की बुआई शुरू हो चुकी है। इसके अलावा गेहूं की बोआई की भी तैयारी शुरू हो गई है। गंगापार में कई किसानों ने बुआई शुरू भी कर दी गई है। ऐसे में खाद की मांग बढ़ गई है। किसानों एवं अफसरों के अनुसार यूरिया की तो पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है लेकिन डीएपी की कमी बन गई है। विक्रय केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं। आलू, सरसों की गंगापार में अधिक खेती होती है। ऐसे में गंगापार में डीएपी के लिए अधिक मारामारी है। इससे तनाव बन गया है। हालांकि, किसानों को फौरी तौर पर कुछ राहत मिलने जा रही है। एक रैक यानी, 1830.50 मीट्रिक टन डीएपी आ चुकी है। इसके अलावा प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से भी 950 मीट्रिक टन डीएपी मंगाई गई है। चूंकि, आलू, सरसों और गेहूं की बुआई गंगापार में शुरू है। इसलिए 80 फीसदी डीएपी गंगापार में भेजी जाएगी। जिला कृषि अधिकारी सुभाष मौर्या ने बताया कि एक रैक डीएपी का वितरण समितियों, विक्रय केंद्रों के लिए कर दिया गया है। प्राइवेट एजेंसी से मंगाई गई खाद भी रविवार और सोमवार को समितियों पर भेज दी जाएगी। उन्होंने बताया कि दो रैक और डीएपी के लिए एक-दो दिनों में शासन को लिखा जाएगा।
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बढ़ेगी मुसीबत
0 धान की कटाई शुरू हो चुकी है। इसके बाद गेहूं की बुआई में तेजी आएगी। ऐसे में 15 दिनों बाद डीएपी की मांग कई गुना बढ़ जाएगी। अभी से डीएपी की कमी हो गई है। ऐसे में मांग बढ़ने पर परेशानी बढ़ने की आशंका है।
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दूसरे जिलों से आ रहे किसान
0 डीएपी के लिए दूसरे जिलों के किसान भी आ रहे हैं। इफ्को फूलपुर समेत कई अन्य केंद्रों पर यमुनापार के किसान भी लाइन लगा रहे हैं। इनके अलावा प्रतापगढ़, भदोही, कौशाम्बी आदि जिलों के किसान भी आ रहे हैं। फूलपुर के अंबिका पटेल, सूरज का कहना है कि दूसरे जिलों से सैकड़ों लोग रोजाना खाद के लिए लाइन लगा रहे हैं। इसे लेकर अक्सर विवाद भी होता है। इससे डीएपी संकट और गहराने की आशंका है।
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संकट से बचने के लिए पहले ही ले रहे खाद
0 डीएपी का संकट पूरे प्रदेश में है। इसे देखते हुए किसान पहले ही खाद ले लेना चाहते हैं। जबकि, गेहूं की बुआई में 15 दिनों से भी अधिक समय बाकी है। किसानों का कहना है कि जरूरत के वक्त खाद की कमी हुई तो खेती पिछड़ जाएगी। इसलिए वे पहले ही डीएपी ले लेना चाहते हैं।
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