इससे पहले वर्ष १९६० में सुमित्रानंद पंत, वर्ष १९६२ में अमृतराय, वर्ष १९६५ में डॉ.नागेंद्र, वर्ष १९६८ में हरिवंश राय बच्चन, वर्ष १९७१ में महादेवी वर्मा, वर्ष १९८३ में सर्वेश्वर दयाल सक्सेना और वर्ष १९८८ में नरेश मेहता को साहित्य अकादमी सम्मान दिया गया था।
प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी सम्मान से प्रयागराज के रचनाकारोंं की झोली भरती रही है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की पूर्व अध्यक्ष और सुपरिचित लेखिका प्रोफेसर नीलम सरन गौर को वर्ष २०२३ का साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया जाएगा।
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इससे पहले वर्ष १९६० में सुमित्रानंद पंत, वर्ष १९६२ में अमृतराय, वर्ष १९६५ में डॉ.नागेंद्र, वर्ष १९६८ में हरिवंश राय बच्चन, वर्ष १९७१ में महादेवी वर्मा, वर्ष १९८३ में सर्वेश्वर दयाल सक्सेना और वर्ष १९८८ में नरेश मेहता को साहित्य अकादमी सम्मान दिया गया था।
तकरीबन दो दशक बाद वर्ष २००७ में अमरकांत को उपन्यास ‘इन्हीं हथियारों से’ के लिए यह सम्मान मिला। वर्ष २०१६ में नासिरा शर्मा जबकि बीेते वर्ष २०२२ में सुपरिचित साहित्यकार प्रोफेसर बद्री नरायण को उनकी रचना तुमड़ी के शब्द के लिए साहित्य अकादमी सम्मान दिया गया। वहीं संस्कृत भाषा में वर्ष १९८१ में जगन्नाथ पाठक और उर्दू में वर्ष १९८६ में पद्मश्री शम्सुर्रहमान फारूकी को साहित्य अकादमी सम्मान से नवाजा गया था।