Prayagraj News : मठ बाघंबरी गद्दी।
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महंत नरेंद्र गिरि ने भी अपने सुसाइड नोट में बलवीर गिरि को ही मठ का उत्तराधिकारी बनाते हुए उन्हें अपने क मरे की चाबी सौंपने की इच्छा व्यक्त की थी। लेकिन, उनकी मौत के बाद सुसाइड नोट पर ही सवाल उठने पर यह मामला लंबित हो गया था।
अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि, सचिव श्री महंत रवींद्र पुरी के अतिरिक्त अखाड़ा परिषद के महामंत्री और जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत हरि गिरि ने भी सुसाइड नोट को फर्जी बताते हुए अस्वीकार कर दिया था।
सुसाइड नोट पर सवाल उठने के बाद निरंजनी अखाड़े के उप महंत बलबीर गिरि ने भी स्वयं को उत्तराधिकार के मुद्दे से यह कहते हुए अलग कर लिया था कि मैं अभी मठ का उत्तराधिकारी नहीं हूं। अखाड़े के पंच परमेश्वर जिसे यह दायित्व सौपेंगे, वह मठ के महंत की जिम्मेदारी का निर्वाह करेगा।
prayagraj : महंत बलवीर गिरि।
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वसीयत में दो बार लिखा था बलवीर का नाम
महंत नरेंद्र गिरि ने अपनी वसीयत में बलवीर गिरि का दो बार जिक्र किया था। अपने उत्तराधिकारी को लेकर उन्होंने तीन बार वसीयतें बनवाईं। पहली बार 2010 में उत्तराधिकार को लेकर की गई वसीयत में शिष्य बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनाया था। लेकिन बलवीर गिरि के हरिद्वार में ही व्यस्त रहने के कारण उन्होंने 29 अगस्त वर्ष 2011 में दूसरी बार जब वसीयत तैयार कराई तो अपने शिष्य स्वामी आनंद गिरि को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।
बाघंबरी मठ में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी को श्रद्धांजलि देने के बाद संतों से चर्चा करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
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लेकिन, आनंद गिरि से दूरियां बढ़ने लगीं तो महंत नरेंद्र गिरि ने चार जून 2020 को अपनी पूर्व में तैयार कराई गई दोनों वसीयतों को निरस्त करते हुए तीसरी वसीयत तैयार कराई। इस तीसरी रजिस्टर्ड वसीयत में उन्होंने एक बार फिर यानी दोबारा बलवीर गिरि को ही मठ बाघंबरी का उत्तराधिकारी घोषित किया था। इस विवाद के बाद पंच परमेश्वर की बैठक भी स्थगित कर दी गई।
Prayagraj News : मठ बाघंबरी गद्दी।
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