कोविड-19 के संक्रमण के बीच संगम की रेती पर बसने वाले माघ मेले को संतों-भक्तों के लिए आकर्षक और खास बनाने के लिए मेला प्रशासन ने बड़ा फैसला किया है। इस बार भी मेले को खानपान के साथ ही कला और मनोरंजन से यादगार बनाने की नए सिरे से तैयारी की गई है। इसके लिए अब हर किसी का ध्यान खींचने वाले झूले भी लगेंगे और मीना बाजार की तर्ज पर दुकानें भी सजाई जाएंगी।
कोरोना संक्रमण को लेकर जारी गाइड लाइन के बीच मेला प्रशासन ने संगम पर कल्पवास की आस्था के साथ कला-संस्कृति के भी समागम की योजना पर काम किया है। कोशिश है कि देश-दुनिया से आने वाले संतों-भक्तों के लिए मनोरंजन का भी माहौल मिले और मन पसंद वस्तुओं की खरीदारी का भी। पहले जहां माघ मेले में झूले और मीना बाजार न लगाने का फैसला लिया गया था, वहीं अब झूला लगाने की अनुमति दे दी गई है।
prayagraj news : ड्रैगन ट्रेन।
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राष्ट्रीय एकता विकास प्रदर्शनी एवं मेला नामक संस्था को झूले-चर्खियों से मेले को यादगार बनाने के लिए ठेका दे दिया गया है। इस मेले में अब मनोरंजन के लिए जॉइंट व्हील हवाई झूला, ब्रेक डांस झूला, ड्रैगन ट्रेन, मिकी माउस, जंपिंग चकरी, जादू शो का लोग आनंद उठा सकेंगे। जबकि देश के 16 से अधिक राज्यों के खानपान का स्वाद भी मेले में मिलेगा। इसके लिए फूड कोर्ट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।
इस फूड कोर्ट में पंजाब का मशहूर मक्के का पराठा और सरसों का शाक, गुजरात का ठोकला, दक्षिण भारतीय व्यंजनों में इडली-सांभर, पोहा, बर्गर, डोसा, बनारस का मशहूर चाट, पाप कॉर्न, कैंडी, मुंबई के जुहू चौपाटी की भेलपुरी का भी चटपटा स्वाद संतों-भक्तों को मिलेगा। इसके साथ ही मेला प्रशासन ने परेड में बाजार लगाने पर भी मंथन शुरू कर दिया है। परेड में लगने वाली दुकानों में बनारसी जरदोजी वाली साड़ी, शूट, लहंगा के अलावा फैंसी मैक्सी, तरह-तरह के हसत् शिल्प पर आधारित बैग, पर्स, पैरदान, क्राकरी, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, सौंदर्य प्रसाधन, कटलरी,लकड़ी और बांस के खिलौने, स्टील का सामान, फैंसी चप्पल, फिरोजाबादी और जयपुरी चूड़ियां व प्लास्टिक के कड़े तीर्थयात्रियों का ध्यान खींचेंगे।