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इलाज पर महंगाई की मार: 30 फीसदी बढ़े जरूरी दवाओं के दाम, शुगर, बीपी, हार्ट, न्यूरो समेत अन्य बीमारियों की दवाएं हुई महंगी

मुनेंद्र बाजपेयी, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 30 Sep 2021 10:42 PM IST
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कच्चे माल की कमी और कीमतों में वृद्धि के असर से इलाज महंगा हो गया है। कोराना संक्रमण की रफ्तार धीमी होने के बीच शुगर, बीपी, हार्ट, न्यूरो समेत अन्य बीमारियों की जरूरी दवाओं की कीमतें करीब 30 फीसदी तक बढ़ गई हैं। बुखार की सामान्य दवा पैरासीटामॉल के दाम हर नए बैच के साथ बढ़ रहे हैं। थोक दवा विक्रेताओं और मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि हर बार प्रिंट रेट बढ़ कर आ रहा है। 
लंबी अवधि की बीमारियों (क्रॉनिकल डिसीज) से पीड़ितों को बढ़े दामों में दवाएं मिल रही हैं। कोरोना काल के करीब 18 महीनों में यह तीसरी बार है, जब जरूरी दवाओं के दाम बढ़े हैं। यह मूल्य वृद्धि औसतन तीस फीसदी है। इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ रहा है। दवाओं के दाम बढ़ने से ज्यादा दिक्कत पेंशनरों को हो रही है, जिन्हें पेंशन का अधिकांश हिस्सा दवाओं पर खर्च करना पड़ रहा है। वहीं सामान्य बुखार, खांसी, सर्दी-जुकाम के मरीजों को भी पिछले सीजन से इस बार जरूरी दवाओं की ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।

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कच्चे माल की कमी और कीमतों में वृद्धि के असर से इलाज महंगा हो गया है। कोराना संक्रमण की रफ्तार धीमी होने के बीच शुगर, बीपी, हार्ट, न्यूरो समेत अन्य बीमारियों की जरूरी दवाओं की कीमतें करीब 30 फीसदी तक बढ़ गई हैं। बुखार की सामान्य दवा पैरासीटामॉल के दाम हर नए बैच के साथ बढ़ रहे हैं। थोक दवा विक्रेताओं और मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि हर बार प्रिंट रेट बढ़ कर आ रहा है। 
लंबी अवधि की बीमारियों (क्रॉनिकल डिसीज) से पीड़ितों को बढ़े दामों में दवाएं मिल रही हैं। कोरोना काल के करीब 18 महीनों में यह तीसरी बार है, जब जरूरी दवाओं के दाम बढ़े हैं। यह मूल्य वृद्धि औसतन तीस फीसदी है। इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ रहा है। दवाओं के दाम बढ़ने से ज्यादा दिक्कत पेंशनरों को हो रही है, जिन्हें पेंशन का अधिकांश हिस्सा दवाओं पर खर्च करना पड़ रहा है। वहीं सामान्य बुखार, खांसी, सर्दी-जुकाम के मरीजों को भी पिछले सीजन से इस बार जरूरी दवाओं की ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।

लोगों का कहना है कि साल भर पहले एक रुपये में मिलने वाली पैरासीटामॉल की गोली दोगुने दाम, दो रुपये या अधिक में बिक रही है। इसी तरह बीकासूल समेत अन्य विटामिन की गोलियों और बच्चों के डिब्बा बंद दूध के दाम अब हर महीने बढ़ रहे हैं। लैक्टोजिन ब्रांड का छोटा दूध का डिब्बा अगस्त में 250 का था, सितंबर में इसके डिब्बे पर 260 रुपये का प्रिंट आ गया है। 

दवाओं के दामों में 20 से 30 फीसदी वृद्धि हुई है। महंगाई का असर शुगर, बीपी, यूरो, न्यूरो व कार्डियो डिजीज की दवाओं पर हैँ। दवा निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधि बताते हैं कि दवाओं के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल की कीमतें 40 से 60 फीसदी बढ़ी हैं। इधर हर नए बैच के स्टॉक पर दाम बढ़े आ रहे हैं। मूल्य वृद्धि का असर बिक्री पर भी पड़ा है। बजट के हिसाब से लोग कम खरीदारी कर रहे हैं। - अनिल दुबे, अध्यक्ष, प्रयाग केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
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