याची पुलिस कर्मियों के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम एवं अतिप्रिया गौतम ने कोर्ट को बताया कि निलंबन आदेश जारी करने के बाद पुलिस अधीक्षक (क्षेत्रीय) विशेष शाखा अभिसूचना विभाग उत्तर प्रदेश के आदेश दिनांक 29 जनवरी 2024 के तहत मंडलाधिकारी अभिसूचना विभाग उत्तर प्रदेश कानपुर को प्रारंभिक जांच आवंटित की गई तथा मंडलाधिकारी अभिसूचना विभाग उत्तर प्रदेश कानपुर नगर ने याचीगणों को इस प्रकरण में अपना अभिकथन प्रारंभिक जांच में अंकित कराने के लिए दिनांक 13 फरवरी 2024 को निर्देशित किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि निलंबित करते समय सक्षम अधिकारी के पास कोई साक्ष्य नहीं था और बिना ठोस साक्ष्य के निलंबित करने का आदेश मनमाना कार्य है। बहस में यह भी कहा गया कि निलंबन आदेश में गलत तथ्य दर्शाए गए हैं। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने अपने आदेश में कहा है कि रिकॉर्ड अवलोकन करने के बाद यह प्रतीत होता है कि याचीगणों के विरुद्ध प्रारंभिक जांच विचाराधीन है। कोर्ट ने सच्चिदानंद त्रिपाठी के केस में प्रतिपादित की गई व्यवस्था को आधार मानते हुए निलंबन आदेश को विधि विरुद्ध माना।