इस पर बिल्डर ने यूपी सरकार के समक्ष पुनर्विचार अर्जी दाखिल की जो लंबित है। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ऐसे ही मामले में एक आदेश पारित किया है, जिसमें कहा गया है कि पुनर्विचार अर्जी लंबित होने पर बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती है। लिहाजा, बिल्डर के खिलाफ अभी कोई नहीं की जा सकी है।
इस पर याची अधिवक्ता गौतम बघेल ने कहा कि लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार को ऐसे मामलों को निस्तारित करने के लिए चार सप्ताह की अवधि का समय तय किया है लेकिन यूपी सरकार ऐसा नहीं कर सकी है। इस वजह से बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी है। पुनर्विचार अर्जी अभी लंबित है।
इसके बाद जीडीए उपाध्यक्ष ने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में कई बदलाव किए हैं और प्राधिकरण को पहली बार लाभ में पहुंचाया है। उन्होंने यह कहा कि मनमाने तरीके से बढ़ाए गए 134 फ्लैट की जानकारी उन्हें नहीं हो सकी। इस पर कोर्ट ने परियोजना की निगरानी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने और याची को अवमानना याचिका में यूपी सरकार को पक्षकार बनाए जाने का आदेश पारित किया।
मामला रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव से जुड़ा हुआ है। फ्लैटों की संख्या अधिक होने की वजह से एसोसिएशन का चुनाव नहीं हो सका। कुछ लोगों ने चुनाव कराने के लिए याचिका दाखिल की जिस पर बिल्डर द्वारा की गई कारस्तानी का पता चला। कोर्ट ने इस मामले में जीडीए वीसी को तलब करते हुए पूरे मामले में जानकारी मांगी थी।