इस दौरान बर्रे, अलसी और गेहूं की बालियों के साथ लोगों ने होलिकाओं की परिक्रमा की। मनमोहन पार्क के सुनील श्रीवास्तव इस बार मुहल्ले की अपनी पुरानी टोली के साथ होलिका दहन के लिए निकले। शाम को ही उनके घर में बच्चों से लेकर बड़ों तक को उबटन लगाया गया, ताकि उनके शरीर के कष्टों को उतारकर होलिका में जलाया जा सके। इसी तरह संगम पर जय त्रिवेणी जय प्रयाग की ओर से प्रदीप पांडेय के नेतृत्व में होलिका दहन किया गया। आंकड़े के अनुसार फाल्गुनी पूर्णिमा में जिले में इस बार तीन हजार से अधिक जगहों पर स्थापित की गई होलिकाओं को जलाया गया।
शहर में एक हजार और ग्राम्यांचलों में दो हजार से अधिक स्थानों पर होलिका दहन किया गया। सिविल लाइंस से चौक, मुट्ठीगंज, कीडगंज, जीरो रोड, दारागंज, बहादुरगंज, अतरसुइया, मीरापुर, लूकरगंज, सुलेमसराय, मम्फोर्डगंज, राजापुर, अशोकनगर समेत शहर के तिराहों चौराहों पर होलिकाओं का दहन किया गया।
दहन से पहले होलिका की प्रतिमाओं के साथ गोद में भक्त प्रह्लाद की मूर्ति रखी गई। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक इस दिन भगवान शिव ने कामदेव को भी भस्म किया था। दूसरा प्रसंग यह भी है कि हिरण्याकश्यप की बहन ढुंढा राक्षसी को आग में न जलने का वरदान था। वह अपने भाई हिरण्याकश्यप के कहने पर अपने भतीजे भक्त प्रह्लाद को लेकर अग्निकुंड में बैठ गई थी, लेकिन अपनी ईश्वर की भक्ति के बल पर प्रह्लाद बच गए। होलिका रूपी ढुंढा राक्षसी जलकर समाप्त हो गई।