फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

होली 2022 : होलिकाओं संग जले विकार, आज से संगमनगरी में तीन दिन होली

Fri, 18 Mar 2022 12:22 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

रात 1.10 बजे तक भद्रा होने की वजह से होलिका दहन आधी रात को बाद आरंभ हुआ। हर मुहल्ले में तिराहे-चौराहों पर लकड़ी, फूस से होलिकाएं ऊंची की गईं। बहादुरगंज, चौक इलाके में होलिका की प्रतिमाएं भी लकड़ियों के ढेर के साथ स्थापित की गईं। शुभ मुहूर्त का इंतजार खत्म होने के साथ ही सूर्य-चंद्रमा की पूजा की गई।
विज्ञापन
demo pic - फोटो : istock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संगमनगरी में बृहस्पतिवार की मध्यरात्रि के बाद असत्य और विकारों की प्रतीक होलिकाओं का मंत्रोच्चार के साथ दहन कर दिया गया। हवन-पूजन के बाद पुरोहितों ने अग्नि प्रजज्वलित कर होलिकाओं में वर्ष भर के विकारों की आहुति दी। इसी के साथ जिले भर में शहर और ग्रामीण इलाकों को मिलाकर चार हजार से अधिक होलिकाओं का दहन किया गया। अब शुक्रवार से तीन दिन तक शहर में रंगों की होली होगी।

विज्ञापन





इस बार रात 1.10 बजे तक भद्रा होने की वजह से होलिका दहन आधी रात को बाद आरंभ हुआ। हर मुहल्ले में तिराहे-चौराहों पर लकड़ी, फूस से होलिकाएं ऊंची की गईं। बहादुरगंज, चौक इलाके में होलिका की प्रतिमाएं भी लकड़ियों के ढेर के साथ स्थापित की गईं। शुभ मुहूर्त का इंतजार खत्म होने के साथ ही सूर्य-चंद्रमा की पूजा की गई।

Trending Videos

आग लगाने से पहले की गई परिक्रमा

इसी के साथ हवन कर दुख-दारिद्रय और तन-मन के विकारों की आहुति देते हुए होलिकाओं में अग्नि प्रज्ज्वलित कर दी गई। होलिकाओं में आग लगने के साथ ही वर्ष भर के मंगल की कामना करते हुए लोगों ने परिवार के सदस्यों के साथ होलिकाओं की परिक्रमा की। इस दौरान अलसी और गेहूं की बालियों के साथ लोगों ने होलिकाओं की परिक्रमा की।




आंकड़े के अनुसार फाल्गुनी पूर्णिमा में जिले में इस बार चार हजार से अधिक जगहों पर स्थापित की गई होलिकाओं को जलाया गया। पुराने शहर कटरा में मनमोहन पार्क से नेतराम चौराहे वाली रोड पर तो पूरे पेड़ के ढूंढ को जल समेत ही होलिका के रूप में स्थापित कर दिया गया था। इसके अलावा चौक, मुट्ठीगंज, कीडगंज, जीरो रोड, दारागंज, बहादुरगंज, अतरसुइया, मीरापुर, लूकरगंज, सुलेमसराय, मम्फोर्डगंज, राजापुर, अशोकनगर समेत शहर के तिराहों चौराहों पर नौ से से अधिक स्थानों पर होलिकाओं का दहन किया गया।
विज्ञापन

होलिका और भक्त प्रहलाद की लगी है प्रतिमा

दहन से पहले होलिकाओं में कई जगह होलिका की प्रतिमाओं की गोद में भक्त प्रह्लाद को भी दिखाया गया था। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक भागवत पुराण के अनुसार हिरण्याकश्यप की बहन ढुंढा राक्षसी को आग में न जलने का वरदान था।  अपने भाई हिरण्याकश्यप के कहने पर ढुंढा अपने भतीजे भक्त प्रह्लाद को लेकर अग्निकुंड में बैठ गई थी, लेकिन अपनी भक्ति और तप के बल पर भक्त प्रह्लाद बच गए और ढुंढा राक्षसी आग की लपटों में जलकर स्वाहा हो गई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें