हाईकोर्ट ने उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के सदस्य रामेंद्र बाबू चतुर्वेदी और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। चतुर्वेदी की नियुक्ति को जनहित याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई है। आरोप है कि प्रदेश सरकार ने मानकों की अनदेखी कर राजनीतिक कारणों से चतुर्वेदी को आयोग का सदस्य बना दिया, जबकि वह इस पद की अर्हता नहीं रखते हैं। याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
याची के वकीलों अनिल बिसेन और अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि रामेंद्र बाबू की नियुक्ति बिना मानकों का पालन किए की गई है। नियुक्ति से पूर्व किसी से बायोडाटा नहीं लिया गया। अन्य योग्य अभ्यर्थियों के नाम पर विचार किए बिना नियुक्ति कर दी गई। चतुर्वेदी नियुक्ति के मानकों को पूरा नहीं करते हैं। अयोग्य सदस्यों से आयोग द्वारा की जा रही सहायक प्रोफेसरों की नियुक्तियां प्रभावित होने की आशंका है। इसलिए उनकी नियुक्ति रद्द की जाए। कोर्ट ने प्रदेश सरकार और रामेंद्र बाबू को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी हाईकोर्ट ने उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष और तीन सदस्यों को आयोग से हटा दिया था। कोर्ट ने तीनों को सदस्य पद पर नियुक्त होने के योग्य नहीं पाया। मौजूदा समय में आयोग में एक मात्र सदस्य रामेंद्र बाबू चतुर्वेदी ही बचे हैं। उनकी नियुक्ति को भी कोर्ट में चुनौती दी गई है।