याचिका दाखिल करने सिपाहियों की नियुक्ति वर्ष 1998 में हुई थी। परन्तु उन्हें न तो द्वितीय वेतनमान दिया जा रहा था और न ही उनकी प्रशिचण अवधि को सेवा में जोड़ा जा रहा था। वरिष्ठ अधिवक्ता गौतम का कहना था कि प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेश 21 जुलाई 2011 के तहत वे सभी पुलिस कर्मी जिन्होंने विभाग में 16 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें उनके प्रशिक्षण अवधि की सेवा को जोड़ते हुए द्वितीय प्रोन्नति वेतनमान ग्रेड पे 4200 रुपये दरोगा को मिलने वाला वेतनमान दिया जाना चाहिए।
याचिका में कहा गया था कि लाल बाबू शुक्ला केस में हाईकोर्ट द्वारा प्रतिपादित विधि सिद्धांत के अनुसार याची सिपाहियों की प्रशिक्षण अवधि की सेवा को जोड़ा जाना चाहिए। कहा यह भी गया था कि अपर पुलिस महानिदेशक, मुख्यालय द्वारा 17 मार्च 2012 के शासनादेश में यह कहा गया है कि प्रदेश पुलिस के कार्यकारी बल में आरक्षी पद का ग्रेड पे दो हजार, मुख्य आरक्षी का 2400, दरोगा का ग्रेड पे 4200- तथा इंस्पेक्टर का ग्रेड पे 4600 अनुमन्य है।
कहा गया था कि सभी याचीगण 16 वर्ष की संतोष जनक सेवा पूरी कर चुके हैं। अत: वे दरोगा पद का ग्रेड पे 4200 रुपया प्रशिक्षण अवधि की सेवा को जोड़ते हुए पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने उक्त आदेश के साथ याचिका को निस्तारित कर दिया है।