हाईकोर्ट में विचाराधीन मामले की मेरिट पर मीडिया में टिप्पणी करना एवं मीडिया में याची पर रिकॉर्ड से इतर आरोप लगाना जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सीतापुर को महंगा पड़ गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह की हरकत को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्टीकरण मांग लिया है।
सीतापुर में कार्यरत रहीं सहायक अध्यापिका लक्ष्मी शुक्ला अपने अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के उपरांत नव तैनाती जनपद उन्नाव से वापस सीतापुर भेजे जाने की कार्यवाही से क्षुब्ध थीं। अपने पति के असाध्य बीमारी से पीड़ित होने संबंधी चिकित्सीय प्रमाण पत्रों पर सीएमओ की मोहर न लगे होने के कारण जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, उन्नाव ने सहायक अध्यापिका को वापस सीतापुर के लिए कार्यमुक्त कर दिया गया था, जिसको रिट याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता रजत ऐरन एवं ऋषि श्रीवास्तव द्वारा जस्टिस अब्दुल मोइन की एकल पीठ को मीडिया में छपी खबरें दिखाते हुए सूचित किया गया कि बीएसए सीतापुर द्वारा प्रकरण के रिकॉर्ड से इतर मीडिया में याची के ऊपर गलत एवं फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्रों का आरोप लगाया जा रहा है, जिससे याची को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त प्रतिष्ठा के अधिकार का हनन हो रहा है।
दलील दी गई कि न्यायालय में विचाराधीन मामले की मेरिट पर टिप्पणी करने से न्यायिक प्रशासन के क्षेत्राधिकार में दखल दिया जा रहा है। प्रथम दृष्टया गंभीर मामला देख हाईकोर्ट द्वारा सात दिन के अंदर बीएसए, सीतापुर से निजी हलफनामा दाखिल कर पूछा है कि उनके विरुद्ध कार्यवाही क्यों ना की जाए।