चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
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हाईकोर्ट ने कहा है कि शस्त्र लाइसेंस प्रदान करने वाले प्राधिकारी के लिए यह आवश्यक है कि वह लाइसेंस निरस्त करते समय उसके कारणों पर ठीक तरह से विचार करे। मात्र किसी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होने या किसी से निजी दुश्मनी लाइसेंस निरस्त करने का आधार नहीं हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि लाइसेंस निरस्त करने का आदेश देते समय इस बात पर विचार होना चाहिए उससे जनसुरक्षा या लोक शांति को वास्तव में खतरा है अथवा नहीं।
प्रतापगढ़ के दिनेश सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने दिया है। याची के अधिवक्ता दिनेश राय का कहना था कि डीएम प्रतापगढ़ ने याची का शस्त्र लाइसेंस 31 मई 2008 को निरस्त कर दिया। उसके खिलाफ धमकाने, गालीगलौज और शस्त्र के दुरुपयोग का मुकदमा दर्ज हुआ था। बाद में याची इस मुकदमे में बरी हो गया। उसके खिलाफ कोई दूसरा आरोप या मुकदमा भी नहीं है। डीएम के आदेश के खिलाफ कमिश्नर इलाहाबाद ने भी अपील खारिज कर दी।
अधिवक्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा रामचंद्र यादव बनाम कमिश्नर इलाहाबाद और जीतेंद्र नाथ सिंह बनाम राज्य सरकार आदि मुकदमों में पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा कि मात्र मुकदमा दर्ज होने या किसी से दुश्मनी के आधार पर शस्त्र लाइसेंस निरस्त करना अनुचित है। कोर्ट ने डीएम प्रतापगढ़ और कमिश्नर इलाहाबाद के आदेशों को रद्द करते हुए डीएम को आदेश दिया है कि वह याची का शस्त्र लाइसेंस पर उपरोक्त निष्कर्ष के आलोक में फिर से विचार कर आदेश पारित करें।