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प्रयागराज : क्षय रोगियों के उपचार के लिए जिले में खुलेंगे चार नए सेंटर

Wed, 20 Oct 2021 09:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
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टीबी - फोटो : social media
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एचआईवी संक्रमित होने के अलावा कुपोषित, मधुमेह पीड़ित, धूम्रपान व शराब का सेवन करने वालों को टीबी होने की आशंका अधिक रहती है। इसलिए शुरुआती लक्षण नजर आए तभी सतर्क हो जाएं और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से परामर्श लें तो बीमारी का खतरे से आसानी से निपटा जा सकता है। यह जानकारी बुधवार को जिला क्षय रोग (डीटीओ) अधिकारी डॉ. अरुण कुमार तिवारी ने दी। उन्होंने बताया कि इससे संक्रमण को रोकने के लिए जिले में चार नए ट्रीटमेंट सेंटर खोले जा रहे हैं। ये सेंटर करेली, कमलानगर, नारीबारी, असरावलकला में संचालित होंगे।
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डीटीओ बुधवार को सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीएफएआर) के सहयोग से स्थानीय होटल में आयोजित जिलास्तरीय मीडिया कार्यशाला में बोल रहे रहे थे। जिला कार्यक्रम समन्वयक एसके सैमसन ने बताया कि टीबी से जुड़ी योजनाओं के संचालन के लिए निजी स्वास्थ्य से जुड़े प्रैक्टिशनर, क्लीनिक, अस्पताल, नर्सिंग होम, लैब और केमिस्ट आदि के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। अधिसूचित करने के लिए 500 रुपए और परिणाम बताने के लिए 500 रुपये देने का प्रावधान है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की डॉ. तृष्णा मोहंती ने बताया कि क्षय रोग एक जानलेवा संचारी रोग है।

यह बीमारी रोगी के खांसने, छींकने या थूकने पर हवा में निकलने वाले बैक्टीरिया के संपर्क में आने से होती है। सामान्यत: यह फेफड़ों को प्रभावित करता है। पूरी दुनिया में खराब स्वास्थ्य और मौत का यह एक मुख्य कारण क्षय रोग ही है। वर्ष 2020 तक कुल 26 लाख यानि 188 प्रति लाख क्षय रोगी भारत में पाए गए हैं। दुनिया की एक चौथाई आबादी क्षय रोग से संक्रमित है। साथ ही पांच से 10 प्रतिशत लोगों को अपने जीवन में क्षय रोग होने की संभावना है। इस दौरान मंचदूतम नाटय समिति वाराणसी की ओर से प्रतिरोधक क्षमता के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस मौके पर धीरेंद्र प्रताप सिंह, आशीष सिंह, समर बहादुर सिंह, अभय, अजय रोशन, ज्योति सिंह, गोपाल चंद्र, उत्कर्ष सिंह आदि मौजूद रहे।
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दो साल में टीबी के मिले 24 हजार से अधिक मरीज
डीटीओ ने बताया कि जिले में टीबी के दो सालों में 24 हजार से अधिक मरीज मिले हैं। वर्ष 2020 में टीबी से संक्रमित 13652 लोगों को चिन्हित किया गया था। इसमें 7169 सरकारी और 4483 निजी अस्पतालों में चिह्नित किए गए। इसी तरह वर्ष 2021 में कुल 11117 लोग टीबी से संक्रमित पाए गए। इसमें 6641 सरकारी अस्पतालों और 4476 निजी अस्पतालों में पहुंचे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्टेंट) के 419 मामले और वर्ष 2021 में एमडीआर के 270 मामले पंजीकृत किए गए हैं।

कहा कि शुरुआती लक्षण नजरअंदाज करने पर ही क्षय रोग विकराल रूप लेता है। हालांकि, क्षय रोग का हर स्तर पर इलाज संभव है। उन्होंने क्षय रोगियों से जुड़ी योजनाओं का जिक्र किया। कहा कि निश्चय क्षय पोषण योजना (यएनपीवाई) के अंतर्गत पुष्ट रोगी डीएसटीबी और डीआरटीबी के रोगी हर महीने 500 रुपये आर्थिक मदद पा सकते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल 9143 मरीजों को दो करोड़ 41 लाख रुपये की धनराशि इस योजना के तहत दी गई है। इसी तरह उपचार सहायक के लिए मानदेय भी निर्धारित है। 

टीबी चैंपियन कौशल ने शेयर किया अनुभव
जनपद में 40 टीबी चैंपियन है। इनमें से चैंपियन कौशल ने बताया कि उन्हे 2013 में टीबी हुई थी। खांसी आती थी जिसे नजरंदाज किया एक दिन खांसते हुये बलगम में खून आया। फि र प्राइवेट इलाज कराया लेकिन आराम नहीं हुआ। इसके बाद सरकारी अस्पताल में दिखाया। जहां जांच में टीबी की पुष्टि हुई। इलाज शुरू किया और नियमित दवायें खाई। सन 2019 तक दवा खाया और अब पूरी तरह ठीक हो गया हूं।
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