मामले में याचियों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 82 के तहत कार्रवाई की गई। इसके बावजूद भी वे कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए तो अलीगढ़ के लोधा थाने में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। संबंधित अदालत ने उसका संज्ञान लिया। याचियों ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचियों की ओर से कहा गया कि अदालतें इसका संज्ञान नहीं ले सकती हैं। क्योंकि, यह सीआरपीसी की धारा 195(1)(ए)(1) के तहत वर्जित है। कोर्ट ने याची के तर्कों को स्वीकार कर एफआईआर को रद्द कर दिया।