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अबकी पॉलिथीन फ्री होंगे दुर्गा पूजा पंडाल

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Durga Puja Pandal will be free this polythene
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अबकी ‘पॉलिथीन फ्री’ होंगे दुर्गा पूजा पंडाल
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0 प्राकृतिक रंगों के साथ आंतरिक सज्जा में सूप, डलिया, जूट, चटाई का इस्तेमाल
प्रयागराज। देवी दुर्गा के आगमन में चंद रोज ही बचे हैं। दो अक्तूबर को आनंद मेले के साथ दुर्गोत्सव की शुरुआत होगी। अबकी सिर्फ कटरा बारवारी का ही विशेष शताब्दी वर्ष महोत्सव है। लेकिन, अन्य बारवारियों की ओर से भी पूजा पंडालों को अलग-अलग विशेष थीम पर तेजी से तैयार कराया जा रहा है। वहीं देवी प्रतिमाओं की आकर्षक साज-सज्जा के लिए भी कोलकाता से शृंगार सामग्री मंगाई है।
अबकी शहर के ज्यादातर पूजा पंडालों को देवी धाम का स्वरूप दिया गया है। प्रीतमनगर बारवारी में सवा सौ फीट लंबा और 70 फीट चौड़ा ‘मातृधाम’ बनेगा। बंगाल के सोलह कलाकार इसे बनाने में दिन रात जुटे हैं। महासचिव देवाशीष मजूमदार कहते हैं, पंडाल की आंतरिक सज्जा में सूप, डलिया, जूट, चटाई, प्राकृतिक रंग,वनस्पति आदि का प्रयोग किया जाएगा। यहां तीन अक्तूबर को आनंद मेले से पूजा की शुरुआत होगी।
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इसी तरह लूकरगंज बारवारी में भी अबकी पूजा पंडाल को कोलकाता के एक मंदिर का रूप दिया जाएगा। सचिव देवव्रत डे के मुताबिक पूरे पंडाल को मंदिर की तरह ही सजाया-संवारा जा रहा है। बाई का बाग बारवारी को बाबा बर्फानी के दरबार के रूप में तैयार किया जा रहा है। यहां श्रद्धालु बाबा बर्फानी और देवी दुर्गा दोनों के दर्शन कर सकेंगे। टैगोर टाउन बारवारी के प्रदीप मुखर्जी बोले, कोई विशेष थीम तो नहीं है लेकिन, पूजा पंडाल में प्रवेश करने पर मंदिर जैसी शांति का अहसास होगा।
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सिविल लाइंस में ‘महिला सशक्तिकरण’
सिविल लाइंस बारवारी की ओर से प्रयाग संगीत समिति में तैयार कराए जा रहे पूजा पंडाल में अबकी ‘महिला सशक्तिकरण’की थीम दिखेगी। अध्यक्ष डॉ.अमिताव घोष के मुताबिक आंतरिक सज्जा में महिला सशक्तिकरण के विषयों केसाथ ही उनकी उपलब्धियां का बखान भी होगा।
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दरभंगा में दिखेगा ‘सांची का स्तूप’
दरभंगा दुर्गा पूजा बारवारी का पूजा पंडाल अबकी संाची के स्तूप की थीम पर बनाया जा रहा है। महासचिव देवव्रत बासु कहते हैं, उड़ीसा के धवलगिरि के सांची का स्तूप की अनुकृति में पंडाल बनेगा जबकि आंतरिक सज्जा में शीशे की शानदार कारीगरी दिखेगी। बंगाल के नादिया जिले के सत्रह कारीगर तीन महीने से पंडाल निर्माण में जुटे हैं। पंडाल के ही अनुरूप अजंता आर्ट शैली में देवी की प्रतिमा भी रहेगी।
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शास्त्रीनगर में ‘पर्यावरण संरक्षण’ का संदेश
0 वृक्ष को जड़ से उखाड़ने वाले ‘राक्षस’ का संहार करते दिखेंगी देवी
प्रयागराज। शास्त्रीनगर दुर्गा पूजा कमेटी की ओर से अबकी पूजा पंडाल को ‘पर्यावरण संरक्षण’ की थीम पर तैयार कराया जा रहा है। कमेटी के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह पीयूष और महामंत्री प्रतीक सोनी बोले, पूजा पंडाल को वृक्षों, वनस्पतियों से लदे किसी पर्वत का रूप दिया जाएगा, यह बताने के लिए कि पर्यावरण से ही हमारा जीवन और अस्तित्व है।
इसी तरह देवी प्रतिमा में भी नयापन दिखेगा। महिषासुर किसी विशाल वृक्ष को जड़ से उखाड़ने के प्रयास में और देवी ऐसा करने वाले ‘राक्षस’ का संहार करते हुए दिखेंगी। वहीं प्रदूषणमुक्त पूजनोत्सव के तहत पूरे पंडाल को कागज, लुगदी, जूट, बांस जैसी चीजों से तैयार कराया जाएगा। श्रद्धालुओं से भी पालिथीन में पूजा सामग्री या प्रसाद न लाने का अनुरोध किया गया है।
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कटरा में दिखेगा ‘स्वप्नपरी का देश’
0 बारवारी के शताब्दी वर्ष में जगमगाएगी चंदननगर की ‘मैकेनिकल लाइट’
प्रयागराज। दुर्गापूजा उत्सव में अबकी कटरा बारवारी अपना शताब्दी वर्ष मना रही है। यहां अबकी पंडाल किसी ‘स्वप्नपरी के देश’ जैसा दिखेगा। मैकेनिकल लाइट के माध्यम से ‘जंगल बुक’ सजीव होगा। कोलकाता, चंदन नगर के कारीगर देवीस्थान को भव्यता देने में जुटे हैं। ध्वनि एवं प्रकाश के माध्यम से देवी दुर्गा के अवतरण की पूरी कहानी दर्शायी जाएगी। साथ की अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। विसर्जन व शांति जल से समापन होगा।
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बारवारी के प्रवक्ता सौरभ बसु कहते हैं, पहले यह पूजा कर्नलगंज बारवारी के साथ होती थी, लेकिन एक घटना के बाद वर्ष 1920 में कटरा की दुर्गा पूजा ने स्वतंत्र अस्तित्व ले लिया है। पूजा की शुरुआत एक घर से हुई, फिर इसे बारवारी का रूप मिला। कई वर्षों तक विश्वविद्यालय रोड के परेड मैदान और मेयोहाल परिसर में पूजा होने लगी। पांच-छह वर्षों तक न्यायमूर्ति पालोक बसु और फिर वहां से लेफ्टीनेंट भगवंत प्रसाद के आवासीय परिसर में भी पूजा हुई। बारह वर्र्षों तक कचहरी रोड स्थित छप्पन भोग के करीब पूजा होने के बाद बीते तीन वर्षों से स्टेनली रोड स्थित आरडी पैलेस-सारस्वत पैलेस पूजास्थल बन गया है।
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कब, कौन से कार्यक्रम
दो-तीन अक्तूबर/खाने-पीने के तरह-तरह के स्टॉल, कई मनोरंजक खेल
चार अक्तूबर/महिलाओं की ओर से गरबा नृत्य, फिर आगोमनी
पांच अक्तूबर/चिकित्सकों की टोली की ओर से मधुर सदाबहार संध्या
छह अक्तूबर/शंख प्रतियोगिता के साथ शानदार धुनूची नृत्य
सात अक्तूबर/फनकार ग्रुप व बारवारी के साथियों की ओर से सुगम संगीत संध्या
आठ अक्तूबर/सिंदूर दान, सिंदूर खेला
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