अचला सप्तमी पर अलोपीबाग में लगा भीषण जाम।
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भगवान सूर्य की विशेष अराधना
अचला सप्तमी पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर की विशेष पूजा आराधना कर आदित्य हृदय स्त्रोत और सूर्य चालीसा आदि का पाठ कर भगवान सूर्य की स्तुति की। साथ ही घाट पर मौजूद दीन हीनोनं को मसूर दाल, गुड़, तांबा, गेहूं, लाल या नारंगी वस्त्र दान किया। मान्यता है कि अचल सप्तमी पर पूजन करने से भगवान सूर्य की स्थिति कुंडली में प्रबल होती है।
रथ सप्तमी को हुआ था भगवान सूर्य का जन्म
मान्यता है कि अचला सप्तमी यानी रथ सप्तमी को ही भगवान सूर्य का जन्म अदिति के गर्भ से हुआ था। इसी लिए भगवान सूर्य को आदित्य भी कहा जाता है। आज के दिन भगवान सूर्य की पूजा अराधना करने से ग्रहों के राजा सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है जीवन में सफलता मिलती है।