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माघ मेला : अचला सप्तमी पर लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई डुबकी, भगवान सूर्य को दिया अर्ध्य

Fri, 16 Feb 2024 04:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अचला सप्तमी यानी रथ सप्तमी को संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भोर से ही स्नान का दौर शुरू हो गया था। लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई।
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अचला सप्तमी पर संगम स्नान करते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यश, कीर्ति और प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए अचला सप्तमी पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में डुबकी लगाई। इसके बाद विधि विधान पूर्व भगवान भास्कर को अर्ध्य देकर परिवार के मंगलमय जीवन की कामना की। भोर से ही श्रद्धालुओं का संगम तट पर पहुंचना शुरू हो गया था।

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दोपहर 12 बजे तक भीड़ काफी अधिक बढ़ गई। इसके चलते संगम आने के सभी मार्गों पर जाम की स्थिति बन गई। श्रद्धालुओं ने संगम स्नान कर घाट पर मौजूद दीन हीनों को दानपुण्य किया। 

 

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अचला सप्तमी पर अलोपीबाग में लगा भीषण जाम। - फोटो : अमर उजाला
भगवान सूर्य की विशेष अराधना
 
अचला सप्तमी पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर की विशेष पूजा आराधना कर आदित्य हृदय स्त्रोत और सूर्य चालीसा आदि का पाठ कर भगवान सूर्य की स्तुति की। साथ ही घाट पर मौजूद दीन हीनोनं को मसूर दाल, गुड़, तांबा, गेहूं, लाल या नारंगी वस्त्र दान किया। मान्यता है कि अचल सप्तमी पर पूजन करने से भगवान सूर्य की स्थिति कुंडली में प्रबल होती है। 

रथ सप्तमी को हुआ था भगवान सूर्य का जन्म

मान्यता है कि अचला सप्तमी यानी रथ सप्तमी को ही भगवान सूर्य का जन्म अदिति के गर्भ से हुआ था। इसी लिए भगवान सूर्य को आदित्य भी कहा जाता है। आज के दिन भगवान सूर्य की पूजा अराधना करने से ग्रहों के राजा सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है जीवन में सफलता मिलती है। 
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