कोर्ट ने कहा क्या कोई उपाय नहीं है जिससे बिसरा रिपोर्ट जल्दी आए और विवेचना जल्द पूरी हो। कोर्ट ने 11 नवंबर तक सरकारी अधिवक्ता से जानकारी मांगी है। कोर्ट ने कहा जहर देकर मारने या दहेज हत्या के मामलों में संदिग्ध की पहचान में बिसरा रिपोर्ट सहायक होती है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि बिसरा रिपोर्ट जमा करने में देरी से अपराध की विवेचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कोर्ट ने डीजीपी व गृह सचिव को बिसरा जांच में गति लाने का निर्देश दिया है ताकि सही व त्वरित विवेचना हो सके और कोर्ट कार्यवाही में बाधक न बन सके।
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यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने झांसी के ताहिर खान की जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि बिसरा की जांच भी विवेचना का आंतरिक हिस्सा है। जिससे मौत के कारणों का पता चलता है। जांच को गति मिलती है। बिसरा रिपोर्ट न मिलने से विवेचना में देरी होती है। कई केसों में बिसरा सैंपल भेजने में देरी की जाती है। समय से रिपोर्ट नहीं मिलती।
कोर्ट ने कहा क्या कोई उपाय नहीं है जिससे बिसरा रिपोर्ट जल्दी आए और विवेचना जल्द पूरी हो। कोर्ट ने 11 नवंबर तक सरकारी अधिवक्ता से जानकारी मांगी है। कोर्ट ने कहा जहर देकर मारने या दहेज हत्या के मामलों में संदिग्ध की पहचान में बिसरा रिपोर्ट सहायक होती है। बिसरा जांच रिपोर्ट में शरीर के आंतरिक अंगों में जहर या अन्य पदार्थ से मौत के कारण का पता चलता है।