रेलवे अस्पताल में भर्ती एक इंजीनियर रविवार की रात अस्पताल से भाग गए और नए यमुना पुल से कूदकर खुदकुशी कर ली। सीवियर डिप्रेशन के शिकार इंजीनियर को तीन दिन पहले तब भर्ती कराया गया था, जब उन्होंने नए यमुना पुल से कूदकर खुदकुशी का प्रयास किया था। उस वक्त नाविकों ने उन्हें बचा लिया था। पुलिस का कहना है कि किसी घरेलू विवाद के कारण वे डिप्रेशन का शिकार हो गए थे।
चक निरातुल धूमनगंज के रहने वाले राजेंद्र नाथ केसरवानी के बेटे शैलेश केसरवानी (38) रेलवे में जेई थे। इन दिनों उनकी पोस्टिंग रायबरेली में थी। परिवार में मां-बाप के अलावा पत्नी मनीषा और आठ साल का एक बेटा है। घर में कुछ विवाद के बाद शैलेश डिप्रेशन में चले गए थे। इसके बाद वह छुट्टियां लेकर घर चले आए। तीन दिन पहले वह बिना बताए नए यमुना पुल पर पहुंचे और नदी में कूद गए। दिन का वक्त होने के कारण वहां तमाम नाविक मौजूद थे। उन लोगों ने शैलेश को बचा लिया।
घर वालों ने उन्हें डाक्टर की सलाह पर रेलवे अस्पताल में भर्ती करा दिया। रविवार की रात अटेंडेंट रात दो बजे के बाद सो गया। इसी समय शैलेश उठे और नए यमुना पुल पहुंचकर नदी में छलांग लगा दी। उधर अटेंडेंट उठा तो शैलेश लापता थे। सूचना पर घर वाले उन्हें चारों ओर ढूंढने लगे। करीब छह बजे नाविकों ने शैलेश की लाश को निकालकर किनारे रख दिया था। उसी समय परिजन भी ढूंढते हुए पहुंच गए। शिनाख्त होने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। दरोगा शरद गुप्ता ने बताया कि घर वालों ने बस उनके डिप्रेशन के बारे में लिखकर दिया है। और उन्होंने कोई बात नहीं बताई।