किला प्रयागराज से सेना के द्वारा संगम घाट तक ऐतिहासिक झंडा निशान शोभायात्रा निकाली गई।
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पहले दस्ते में एडम अनुभाग के अलावा सीसीएमई, आईटीएस, यार्ड, फायर ब्रिगेड, आईएसओ ग्रुप के अफसर घोड़े पर सवार होकर अपने झंडे के निशान के साथ चल रहे थे। दूसरे दस्ते में डिप साइड से उप समादेशक मेजर निशांत तिवारी की अगुवाई में मेजर एसएस महल, कैप्टन नीरज राठौर भी घोड़े पर सवार होकर अपने ग्रुप के सैनिक और असैनिक कर्मियों का नेतृत्व कर रहे थे।
इसी शोभायात्रा में डिपो की प्रथम महिला और समादेशक की पत्नी डॉ. पुनीत कौर भी बग्घी पर सवार होकर निकलीं। इनके अलावा उप समादेशक की पत्नी मौसम अधिकारी भावना वर्मा, डॉ. रीना, और आशा मनोज ने भी उत्साह से इस यात्रा में हिस्सा लिया। संगम नोज पहुंचने पर सेना के धर्मगुरु ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा कराई। यहां कमांडेंट ने आयुध भंडार की समृद्धि के लिए मां गंगा से प्रार्थना की। उन्होंने जवानों को लगन के साथ और बेहतर कार्य करने का संदेश दिया। इस दौरान रास्ते भर सेना के जवानों ने ही सुरक्षा व्यवस्था संभाली।
किला आयुध डिपो को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ सर्टिफिकेट अवार्ड
इस शोभायात्रा के दौरान भारतीय सेना की ओर से आयुध भंडार प्रयागराज को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ सर्टिफिकेट ऑफ एप्रिसिएशन से नवाजा गया। यह प्रमाणपत्र मिलने से किले के सैनिक और असैनिक कर्मचारियो में गर्व और उत्साह और भी दुगना हो गया।