जानकार बताते हैं कि यह बदलाव बहुत कारगर है। इससे बच्चे अपनी पाठ्यपुस्तक के जरिए क्षेत्रीय संस्कृतियों, रीति रिवाजों, सांस्कृतिक स्थलों और विशिष्ट हस्तशिल्प अच्छे से जान सकेंगे। इसके साथ ही छात्र-छात्राएं स्थानीय परिवेश, परंपराओं व सांस्कृतिक विरासत को संपूर्ण भारतीय परिवेश के रूप में परिकल्पित कर सकेंगे। इन बदलावों के बाद छात्र-छात्राओं को विषयवस्तु को लेकर नवीनता की अनुभूति होगी।
नौचंदी और सोनपुर के मेले को भी पढ़ेंगे बच्चे
सारंगी में परिवार पाठ के अंतर्गत स्थानीय लोरियों और कविताओं को शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा जीव जगत, स्थानीय त्योहारों को भी शामिल किया जाएगा। सोनपुर का मेला, मेरठ के नौचंदी का मेला, स्थानीय खान-पान को भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए राज्य शिक्षा संस्थान की तरफ से मॉड्यूल तैयार हो चुका है।