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आयुष्मान भारत योजना : तीन लाख कार्ड...एक भी नहीं ‘आयुष्मान भव’

Wed, 19 May 2021 01:23 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • करीब एक लाख कोरोना संक्रमितों में से किसी को भी नहीं मिला आयुष्मान योजना का लाभ
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आयुष्मान भारत योजना - फोटो : self
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विस्तार
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भारत सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भी कोरोना संक्रमितों के इलाज में बौनी साबित हुई। निजी अस्पतालों में इस योजना के तहत इलाज के लिए कोई नहीं आया। या फिर किसी को इलाज नहीं मिला। जबकि, इस बीमारी की चपेट में आने के बाद इलाज के अभाव में सैकड़ों लोगों ने जान गवां दी। 

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जिले में तीन लाख 14 हजार 893 आयुष्मान कार्डधारक हैं। वहीं कोविड-19 संक्रमितों की कुल संख्या करीब एक लाख रही। इनमें से करीब 65 हजार तो घर पर ही ठीक हो गए लेकिन अन्य को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अप्रैल के दूसरे सप्ताह से हालात ज्यादा गंभीर हो गए। सरकारी ही नहीं सभी निजी अस्पताल भी फुल हो गए। स्थिति यह रही कि स्वरूपरानी और बेली के अलावा 17 निजी नर्सिंग होम होने के बावजूद गंभीर मरीजों को भी अस्पताल में भर्ती नहीं मिली और बिना इलाज के दम तोड़ दिया। यानी, करीब सभी अस्पताल इस दौरान पूरी तरह से भरे रहे लेकिन सरकारी आंकड़ों को देखें तो इनमें आयुष्मान कार्डधारक कोई नहीं रहा। प्रभारी डॉ.राकेश पांडेय का कहना है कि इस योजना के तहत अभी तक किसी कार्डधारक या अस्पताल ने क्लेम नहीं किया है।

आयुष्मान भारत - फोटो : अमर उजाला

नियम की विसंगतियों से नहीं लड़ पाए कोविड संक्रमित

कोविड संक्रमित कार्डधारक आयुष्मान योजना के प्रावधान और विसंगतियों से नहीं लड़ पाए। जहां बेड मिलना मुश्किल हो और ऑक्सीजन के लिए बोली लग रही हो वहां वे आयुष्मान कार्ड किसे दिखाएं। इसलिए उन्होंने सरकारी व्यवस्था में उलझने के बजाय अपनी जान बचाने को प्राथमिकता दी। वहीं कार्ड दिखाने वाले कई संक्रमितों को बिना इलाज के ही वापस होना पड़ा। इसके पीछे निजी अस्पतालों में इलाज पर होने वाले खर्च और योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि में भारी अंतर को बड़ा कारण माना जा रहा है। प्रशासन की ओर से तय किया गया कि 10 दिन तक इलाज चलने पर निजी अस्पताल अधिकतम डेढ़ लाख रुपये लेंगे।

यानी, रोजाना की 15 हजार रुपये खर्च निर्धारित किया गया। इसके विपरीत आयुष्मान भारत योजना के तहत वेंटीलेटर के साथ आईसीयू वार्ड में भर्ती होने पर अधिकतम 4500 रुपये मिलेंगे। आईसीयू वार्ड के लिए 3600, एचडीयू वार्ड के लिए 2700 तथा सामान्य वार्ड के लिए 1800 रुपर्य निर्धारित किए गए। इसके अलावा सरकारी अस्पताल में बेड खाली नहीं होने पर ही निजी नर्सिंग होम में भर्ती की सुविधा मिलेगी। इसके लिए सरकारी अस्पताल का सर्टिफिकेट भी लगाना होगा कि वहां बेड खाली नहीं है। तभी, निजी अस्पताल में भर्ती होंगे। इस जटिल प्रक्रिया से गुजरना किसी के लिए आसान नहीं था। लिहाजा लोगों ने आयुष्मान के भरोसे इलाज कराना मुनासिब नहीं समझा।
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आयुष्मान भारत योजना

निजी अस्पताल में भर्ती नहीं करने की शिकायत, जांच शुरू

अफसरों के अनुसार किसी भी निजी अस्पताल ने आयुष्मान कार्डधारक को वापस नहीं किया। उनके लिए निजी अस्पताल में वार्ड तक सुरक्षित रहे लेकिन कोई आया ही नहीं है लेकिन इन दावों के विपरीत सच्चाई अलग है। इस मामले में एक याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने जांच का आदेश दिया है।

‘योजना में व्यवस्था है कि सरकारी अस्पताल में बेड खानी नहीं होने पर ही निजी अस्पताल में इलाज की सुविधा मिलेगी। कुछ दिनों के लिए यह स्थिति आई जब सरकारी अस्पतालों में बेड खाली नहीं थे। कोविड के सभी बेड फुल रहे। इसकी वजह से निजी अस्पतालों में इलाज की अनुमति दी गई  लेकिन उस समय तक आयुष्मान के अंतर्गत कोविड संक्रमितों के इलाज को लेकर गाइडलाइन जारी नहीं हुई थी। अब स्थिति में सुधार है और सरकारी अस्पतालों में बेड खाली हैं। ऐसे में निजी अस्पताल में भर्ती की अनुमति नहीं दी जा सकती।’ डॉ. प्रभाकर राय, सीएमओ

‘आयुष्मान योजना के तहत इलाज के लिए किसी को मना नहीं किया गया। पैनल में शामिल अस्पतालों में इनके लिए बेड सुरक्षित हैं। इस योजना के तहत निजी अस्पतला में कोई क्यों नहीं आया इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। इतना जरूर है कि कुछ दिन मुश्किलों वाले रहे। स्वाभाविक है ऐसी परिस्थिति में आयुष्मान या अन्य किसी योजना के तरफ ध्यान हीं नहीं जाएगा। जान बचाना प्राथमिकता रही होगी।’ डॉ.सुशील सिन्हा, प्रदेश अध्यक्ष - नर्सिंग होम एसोसिएशन
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