नियम की विसंगतियों से नहीं लड़ पाए कोविड संक्रमित
कोविड संक्रमित कार्डधारक आयुष्मान योजना के प्रावधान और विसंगतियों से नहीं लड़ पाए। जहां बेड मिलना मुश्किल हो और ऑक्सीजन के लिए बोली लग रही हो वहां वे आयुष्मान कार्ड किसे दिखाएं। इसलिए उन्होंने सरकारी व्यवस्था में उलझने के बजाय अपनी जान बचाने को प्राथमिकता दी। वहीं कार्ड दिखाने वाले कई संक्रमितों को बिना इलाज के ही वापस होना पड़ा। इसके पीछे निजी अस्पतालों में इलाज पर होने वाले खर्च और योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि में भारी अंतर को बड़ा कारण माना जा रहा है। प्रशासन की ओर से तय किया गया कि 10 दिन तक इलाज चलने पर निजी अस्पताल अधिकतम डेढ़ लाख रुपये लेंगे।
यानी, रोजाना की 15 हजार रुपये खर्च निर्धारित किया गया। इसके विपरीत आयुष्मान भारत योजना के तहत वेंटीलेटर के साथ आईसीयू वार्ड में भर्ती होने पर अधिकतम 4500 रुपये मिलेंगे। आईसीयू वार्ड के लिए 3600, एचडीयू वार्ड के लिए 2700 तथा सामान्य वार्ड के लिए 1800 रुपर्य निर्धारित किए गए। इसके अलावा सरकारी अस्पताल में बेड खाली नहीं होने पर ही निजी नर्सिंग होम में भर्ती की सुविधा मिलेगी। इसके लिए सरकारी अस्पताल का सर्टिफिकेट भी लगाना होगा कि वहां बेड खाली नहीं है। तभी, निजी अस्पताल में भर्ती होंगे। इस जटिल प्रक्रिया से गुजरना किसी के लिए आसान नहीं था। लिहाजा लोगों ने आयुष्मान के भरोसे इलाज कराना मुनासिब नहीं समझा।