पवन बताते हैं कि तब प्रयागराज के हिंदू संगठनों के अत्यधिक कार्यकर्ता दूर दराज से आए हुए राम भक्तों की व्यवस्था में लगाए गए थे। स्वर्गीय सिंघल का स्पष्ट निर्देश था कि किसी भी कारसेवक को कोई दिक्क्त नहीं होनी चाहिए। आर्थिक रूप से ज्यादा मजबूत न होने के बावजूद अशोक सिंहल तब महावीर भवन से भी लगातार कारसेवकों के लिए भोजन आदि का प्रबंध करवा रहे थे।
उनके निर्देश के बाद प्रयागराज के तमाम कार्यकर्ता भोजन संकलन वितरण और कार सेवकों के शयन व प्राथमिक चिकित्सा और ट्रेन से आगमन एवं प्रस्थान के दायित्व का निर्वाह कर रहे थे। पवन श्रीवास्तव ने आगे बताया कि वह स्वयं अपनी टीम के साथ राम भक्तों की सेवा में तत्पर रहे और 3-4 दिन अपने आवास ना जाकर लगातार बिना रुके बिना थके दायित्व का निर्वाह करते हुए पूरे मनोयोग से समर्पित रहे।
उन्होंने बताया कि जिस दिन विवादित ढांचा ढहा, उसके अगले दिन शहर में कर्फ्यू जैसा माहौल था और समाचार पत्र की मांग बड़ी तेजी से बढ़ गई। हम सभी को इस बात की चिंता थी कि अशोक सिंघल कहा है। अगले दिन समाचार पत्र के माध्यम से उनकी गिरफ्तारी की सूचना हम सब को मिल सकी थी।